Cheque Bounce Case : राजपाल यादव की याचिका पर SC सख्त, राहत के लिए रखी 5 करोड़ की शर्त
यह मामला फिल्म 'अता पता लापता' की फाइनेंसिंग से जुड़े चेक बाउंस का है
चेक बाउंस मामले में जेल की सजा काटने के लिए सरेंडर करने की तैयारी कर रहे अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल अंतरिम राहत मिल गई है। कोर्ट ने आज निर्देश दिया कि यादव को बुधवार यानी 9 सितंबर तक अपनी रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। यह रकम जमा करने के बाद उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत मिल सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
यह मामला फिल्म 'अता पता लापता' की फाइनेंसिंग से जुड़े चेक बाउंस का है। फिल्म प्रोड्यूसर-फाइनेंसर कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ 7 शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों का आधार फिल्म की फाइनेंसिंग के दौरान जारी किए गए सात चेक का बाउंस होना था।
मामले के अनुसार, मुरली प्रोजेक्ट्स ने वर्ष 2010 में फिल्म पूरी करने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये दिए थे। फिल्म की रिलीज में देरी के बाद दोनों पक्षों के बीच कई समझौते हुए और भुगतान की शर्तों में बदलाव किया गया। यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि मूल लेन-देन कर्ज नहीं, बल्कि फिल्म में निवेश था और चेक बतौर सिक्योरिटी दिए गए थे। यादव की याचिका में यह भी दावा किया गया कि बाद में दोनों पक्षों के बीच 10.40 करोड़ रुपये के पूर्ण और अंतिम सेटलमेंट पर सहमति बनी थी। उनका तर्क है कि इस समझौते के बाद पहले जारी किए गए सिक्योरिटी चेक से जुड़ी शिकायतें आगे नहीं चलनी चाहिए थीं।
सात मामलों में हुई थी सजा
ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में प्रत्येक मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। बाद में 22 मई 2019 को सजा घटाकर प्रत्येक मामले में तीन महीने की साधारण कैद और 1.35 करोड़ रुपये जुर्माना कर दिया गया। सभी सजाएं एक साथ चलनी थीं। सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखी। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को यादव की क्रिमिनल रिविजन याचिकाएं खारिज करते हुए सजा में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने के लिए 10 सितंबर की समय-सीमा दी थी।
हाई कोर्ट ने प्रोबेशन की मांग भी खारिज कर दी थी
हाई कोर्ट ने प्रोबेशन की मांग भी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान यादव को विवाद सुलझाने के कई अवसर मिले, लेकिन शिकायतकर्ता को भुगतान के वादे पूरी तरह पूरे नहीं हुए। हालांकि, कोर्ट ने पहले जमा किए गए करीब 2.25 करोड़ रुपये को जुर्माने की रकम में एडजस्ट करने का निर्देश दिया था।

