Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

CBSE 12वीं का गणित पेपर: QR कोड स्कैन करते ही बजने लगा गाना, छात्र हुए 'रिक्‍रोलिंग' का शिकार

हैरान रह गए परीक्षार्थी

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Rickrolling : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की गणित की परीक्षा के दौरान एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। 9 मार्च को आयोजित इस परीक्षा में प्रश्न पत्र पर दिए गए एक क्यूआर (QR) कोड ने छात्रों को आधिकारिक जानकारी देने के बजाय सीधे यूट्यूब के एक मशहूर पॉप सॉन्ग पर पहुंचा दिया। इस घटना के बाद से परीक्षार्थियों और अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

Advertisement

क्या है 'रिक्‍रोलिंग' और क्यों मचा हंगामा?

Advertisement

दरअसल, गणित के प्रश्न पत्र पर सुरक्षा या वेरिफिकेशन के उद्देश्य से एक क्यूआर कोड प्रिंट किया गया था। छात्रों का दावा है कि जब उन्होंने इसे स्कैन किया, तो वे मशहूर गायक रिक एस्टली के 1980 के दशक के हिट गाने 'नेवर गना गिव यू अप' (Never Gonna Give You Up) के वीडियो पर पहुंच गए। इंटरनेट की दुनिया में इसे 'रिक्‍रोलिंग' (Rickrolling) कहा जाता है, जो एक वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय ऑनलाइन प्रैंक (मजाक) है। इस प्रैंक में किसी व्यक्ति को एक जरूरी लिंक बताकर धोखे से इस गाने के वीडियो पर भेजा जाता है।

बोर्ड ने सुरक्षा को लेकर दी सफाई

जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, सीबीएसई ने तुरंत इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। बोर्ड ने स्वीकार किया कि इस मामले को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई है। हालांकि, बोर्ड ने स्पष्ट किया कि प्रश्न पत्र पूरी तरह से 'जेनुइन' (असली) हैं और उनकी सुरक्षा व गोपनीयता के साथ कोई समझौता नहीं हुआ है। बोर्ड के अनुसार, प्रश्न पत्र की सिक्योरिटी 'अनकॉम्प्रोमाइज्ड' है और यह तकनीकी त्रुटि केवल एक बाहरी लिंक तक सीमित है।

सोशल मीडिया पर दिलचस्प प्रतिक्रियाएं

इस घटना ने इंटरनेट पर मीम्स की बाढ़ ला दी है। सोशल मीडिया यूजर्स इस पर जमकर मजे ले रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, "यह अब तक का सबसे बड़ा 'रिक्‍रोल' है क्योंकि इसमें एक साथ हजारों लोग शिकार बने।" वहीं एक अन्य छात्र ने मजाक में लिखा कि "साल 2026 की शुरुआत वाकई काफी दिलचस्प हुई है।" हालांकि कुछ लोग इसे बोर्ड की बड़ी लापरवाही भी मान रहे हैं, लेकिन फिलहाल बोर्ड ने इसे एक तकनीकी चूक के रूप में ही देखा है।

Advertisement
×