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सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, दो आईएएस अफसर सस्पेंड

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला

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सांकेतिक फाइल फोटो।
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हरियाणा में सरकारी फंड से जुड़े आईडीएफसी बैंक घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। हरियाणा की नायब सरकार की सिफारिश के बाद सीबीआई ने इस केस को अपने हाथों में लेते हुए नयी दिल्ली में एफआईआर दर्ज की है। दूसरी ओर, नायब सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन दोनों अधिकारियों के नाम आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व कोटेक महेंद्रा बैंक घोटाले में जुड़े बताए जा रहे हैं।

सीबीआई जल्द पंचकूला और चंडीगढ़ में टीम तैनात कर बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और अन्य सबूत जुटाने के साथ ही हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से दस्तावेज़ हासिल करेगी। मुख्यमंत्री सैनी ने आईएएस अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है। प्रदीप कुमार-। (परिवहन विभाग निदेशक व विशेष सचिव) और राम कुमार सिंह (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव) को निलंबित कर दिया गया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दोनों के निलंबन आदेश जारी किए हैं। हालांकि इनमें सस्पेंड करने के कारणों का जिक्र नहीं है। प्रदीप कुछ ही महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि रामकुमार की डेढ़ वर्ष की सेवा बाकी है।

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इससे पहले, बुधवार रात नायब सरकार ने पंद्रह आईएएस अधिकारियों का तबादला किया था। इनमें पांच आईएएस अधिकारी वे बताए जा रहे हैं, जिनके नाम बैंक खाते खुलवाने व एफडी करवाने में जुड़े हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने इसी वजह ने इन अधिकारियों को प्रमुख पदों से हटाकर उनकी पोस्टिंग अब खुड्डेलाइन की है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में आधा दर्जन से अधिक और अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है।

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इस तरह हुआ खेल

जांच में सामने आया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कोटक महेंद्रा बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक के माध्यम से सरकारी धन को शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। एसीबी के मुताबिक, सरकारी खजाने के पैसे स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरु प्राइवेट लिमिटेड, कैप-को फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स जैसी फर्मों के खातों में भेजे गए। पंचायत विभाग के एमएमजीएवी-20. स्कीम के तहत खाते खोले गए थे। आईडीएफसी बैंक ने 46.56 करोड़ रुपये एयू स्माल फाइनेंस बैंक में भेजे, जबकि एयू बैंक ने 25.45 करोड़ एक्सिस बैंक में डायवर्ट किए। कई चेक में फर्जी हस्ताक्षर पाए गए और अंक तथा शब्दों में राशि में अंतर की वजह से भी रकम गलत तरीके से क्लियर हो गई।

कोटक महिंद्रा बैंक को पैनल से हटाया

हरियाणा सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक को पैनल से हटा दिया है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी सचिवों और विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि बैंक में रखे सभी सरकारी खातों की राशि ट्रांसफर कर खातों को बंद किया जाए। पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये से जुड़े केस में कोटक बैंक ने अब तक केवल 127 करोड़ रुपये लौटाए हैं, जो मूलधन को ही कवर करता है।

28 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है घोटाला

अब तक सामने आए आंकड़ों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में करीब 590 करोड़ और पंचकूला नगर निगम से जुड़े 160 करोड़ रुपये की गड़बड़ की पुष्टि हुई है। सूत्रों के अनुसार, यदि पूरे नेटवर्क और शेल कंपनियों की जांच की गई तो घोटाले करीब 28 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

यह हो सकती आगे की राह

सीबीआई की टीम बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूत जुटाकर पंचकूला और चंडीगढ़ में छापेमारी कर सकती है। दस्तावेज़ों की समीक्षा के बाद जांच और व्यापक हो सकती है। निलंबन और तबादलों से प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में सीबीआई की छापेमारी और दस्तावेजों की पड़ताल पूरे घोटाले का असली चेहरा सामने ला सकती है।

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