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Caste Census : जयराम रमेश बोले- जातिगत गणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है मोदी सरकार   

कांग्रेस के दावों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं

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Caste Census : कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि सरकार जातिगत गणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को 'गुमराह' करने व 'बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी' करने के एजेंडे के साथ महिला आरक्षण कानून में संशोधन करना चाहते हैं।

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कांग्रेस महासचिव (प्रभारी संचार) जयराम रमेश ने दावा किया कि मोदी सरकार यह कहकर अनुच्छेद 334-ए में संशोधन करना चाहती है कि जातिगत गणना के परिणाम कुछ वर्षों तक उपलब्ध नहीं होंगे, लेकिन वह इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि बिहार और तेलंगाना दोनों राज्यों ने छह महीने से भी कम समय में व्यापक जाति सर्वेक्षण पूरा कर लिया है।

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अनुच्छेद 334-ए में यह प्रावधान किया गया है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया के बाद महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में आरक्षण प्रभावी होगा। रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार जातिगत गणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। कांग्रेस के दावों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रमेश ने कहा कि 20 जुलाई, 2021 को सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा था कि उसने जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों की गणना न करने का नीतिगत निर्णय लिया है।

कांग्रेस महासचिव के मुताबिक, 21 सितंबर, 2021 को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि उसने जातिगत गणना न कराने का नीतिगत निर्णय लिया है। 28 अप्रैल, 2024 को एक टेलीविजन साक्षात्कार में, प्रधानमंत्री ने जातिगत गणना के मुद्दे को उठाने के लिए कांग्रेस पर शहरी नक्सली मानसिकता रखने का आरोप लगाया। रमेश ने कहा कि 30 अप्रैल, 2025 को, जब देश कुछ दिन पहले हुए पहलगाम आतंकी हमले के सदमे से उबर ही रहा था, तब मोदी सरकार ने अचानक घोषणा की कि आगामी जनगणना के दौरान जातिगत गणना की जाएगी।

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