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Canada's Police U-turn : भारत सरकार और लॉरेंस बिश्नोई पर लगाए गए आरोपों को लिया वापस

Canada's Police U-turn : भारत और कनाडा के बीच 2024 से जारी कूटनीतिक कड़वाहट के बीच एक बेहद अहम और राहत भरी खबर आई है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के कमिश्नर माइक दुहेमे ने अपने पुराने दावों से पीछे...

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Canada's Police U-turn : भारत और कनाडा के बीच 2024 से जारी कूटनीतिक कड़वाहट के बीच एक बेहद अहम और राहत भरी खबर आई है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के कमिश्नर माइक दुहेमे ने अपने पुराने दावों से पीछे हटते हुए कहा है कि वर्तमान में उनके पास ऐसे कोई सबूत नहीं हैं, जो भारत सरकार को कनाडा की धरती पर किसी भी प्रकार की गुप्त गतिविधियों या 'अंतरराष्ट्रीय दमन' से जोड़ते हों। यह बयान उन आरोपों के बिल्कुल विपरीत है, जिन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को निचले स्तर पर धकेल दिया था।

सीटीवी न्यूज (CTV News) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कमिश्नर दुहेमे ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में चल रही जांचों और आपराधिक सूचनाओं के आधार पर कनाडा में हो रही गतिविधियों का किसी विदेशी इकाई या भारत सरकार से कोई संबंध नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा, "फिलहाल हमारी फाइलों में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि इन घटनाओं के पीछे कोई विदेशी हाथ है।"

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2024 के दावों से क्यों पलटी कनाडा पुलिस?

गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 में इसी आरसीएमपी कमिश्नर ने दावा किया था कि उनके पास भारत सरकार के 'उच्चतम स्तर' के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। तब आरोप लगाया गया था कि भारतीय राजनयिक जानकारी जुटाकर आपराधिक संगठनों, विशेषकर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह को दे रहे हैं ताकि कनाडा में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा की जा सके।

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अब अपने ताजा बयान में दुहेमे ने स्पष्ट किया कि उनके 2024 के बयान उस समय की जांच पर आधारित थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और नई जांचों में वह कड़ी नहीं जुड़ पा रही है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अक्सर इस तरह के मामलों में किसी विशिष्ट विदेशी इकाई के साथ गतिविधियों को जोड़ना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह और 'कॉपीकैट' का खुलासा

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के कनाडा में बढ़ते प्रभाव पर भी पुलिस कमिश्नर ने चौंकाने वाली बात कही है। उन्होंने संकेत दिया कि कनाडा में हो रही कई आपराधिक घटनाओं में कुछ लोग केवल बिश्नोई गिरोह के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

दुहेमे के अनुसार, यह संभव है कि कुछ अपराधी या छोटे गिरोह केवल 'कॉपीकैट' (नकलची) के तौर पर बिश्नोई गैंग का नाम डराने या फिरौती वसूलने के लिए इस्तेमाल कर रहे हों, जबकि उनका उस गैंग से कोई सीधा परिचालन संबंध (Operational Link) न हो। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में कनाडा में हुई कई टारगेट किलिंग्स और जबरन वसूली के मामलों में बार-बार बिश्नोई नेटवर्क का नाम उछाला गया था।

भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की उम्मीद

कनाडा पुलिस के इस बदले हुए रुख को दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। पिछले साल गर्मियों में ही दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां नए उच्चायुक्त नियुक्त किए थे। इसी महीने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नई दिल्ली का दौरा भी किया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि अब दोनों देश पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं।

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