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हरियाणा में एयरपोर्ट की तर्ज पर बस अड्डे, मोबाइल पर दिखेगी बस की Live Location

Haryana Roadways: हरियाणा रोडवेज में डिजिटल बदलाव की रफ्तार तेज, यात्रियों को मिलेगा ‘स्मार्ट ट्रैवल’ अनुभव

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Haryana Roadways: हरियाणा रोडवेज की बसों में अब सफर सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यात्रियों को यात्रा से पहले और दौरान पूरी डिजिटल जानकारी भी मिलेगी। राज्य के परिवहन मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में फतेहाबाद विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि रोडवेज को आधुनिक बनाने की दिशा में ऑटोमैटिक टिकटिंग सिस्टम के साथ-साथ बस ट्रैकिंग सिस्टम और मोबाइल ऐप विकसित किए जा रहे हैं।

इसका उद्देश्य यात्रियों को सटीक जानकारी, पारदर्शिता और सुविधा देना है। परिवहन मंत्री ने बताया कि रोडवेज बसों में पहले से ही ऑटोमैटिक टिकटिंग सिस्टम लगाया गया है, जिसे अब और अधिक एडवांस किया जा रहा है। आने वाले समय में यात्री पेटीएम, कार्ड और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी टिकट ले सकेंगे। इससे न सिर्फ नकद लेन-देन की झंझट कम होगी, बल्कि टिकटों का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा।

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उन्होंने कहा कि हर टिकट विधिवत पंच होगा और उसका डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की अनियमितता पर रोक लगेगी। दौलतपुरिया के एक प्रश्न के जवाब में विज ने बताया कि फतेहाबाद-हिसार लोकल मार्ग पर चलने वाली सभी बसें भोडा-होशनाक और खाराखेड़ी गांवों के बस स्टॉप पर नियमित रूप से रुकती हैं। इस रूट पर प्रतिदिन कुल 66 फेरे लगाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण यात्रियों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बस कहां है, जवाब मोबाइल पर मिलेगा

यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या, बस कब आएगी और अभी कहां है, का समाधान अब तकनीक से किया जा रहा है। परिवहन मंत्री ने बताया कि बसों में ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इस सिस्टम के जरिए यह ठीक उसी तरह पता चल सकेगा, जैसे एयरपोर्ट पर विमान की स्थिति दिखाई देती है। उन्होंने स्वीकार किया कि मैनुअल तरीके से बसों की मॉनिटरिंग करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए यह भी देखा जा सकेगा कि कोई बस अपने निर्धारित रूट पर चल रही है या नहीं और तय स्टॉपेज पर रुक रही है या नहीं।

बस अड्डों पर लगेंगी डिजिटल स्क्रीन

रोडवेज बस अड्डों की तस्वीर भी अब बदलेगी। विज ने बताया कि सभी प्रमुख बस अड्डों पर डिजिटल स्क्रीन लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन पर यह जानकारी दिखाई देगी कि कौन-सी बस किस रूट पर है और कितने समय में बस अड्डे पर पहुंचेगी। इससे यात्रियों को बस स्टैंड पर अनिश्चित इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे समय का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। विज ने कहा कि बसों की जानकारी के लिए एक मोबाइल ऐप भी विकसित की जा रही है। हालांकि, तकनीकी कमियों के चलते इसे दोबारा बेहतर तरीके से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस ऐप के जरिए यात्री खुद यह देख सकेंगे कि उनकी बस कितनी दूर है। साथ ही सरकार भी इस ऐप के माध्यम से बसों की निगरानी कर सकेगी कि वे सही रूट पर चल रही हैं या नहीं, और संचालन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

हरियाणा में इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अगला फेज

हरियाणा सरकार प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक मोड पर शिफ्ट करने की दिशा में अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है। ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शुक्रवार को संकेत दिए कि राज्य में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए बुनियादी ढांचा लगभग तैयार है और आने वाले तीन महीनों के भीतर यह व्यवस्था जमीन पर दिखने लगेगी।

उनका कहना है कि सरकार सिर्फ बसें नहीं, बल्कि पूरे चार्जिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रही है। विज ने बताया कि प्रदेश में विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रिक बस डिपो अब पूरी क्षमता से संचालन के लिए तैयार हैं। इन डिपो से आने वाले तीन महीनों के भीतर इलेक्ट्रिक बसों का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का फोकस केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे प्रदेश स्तर पर एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि शहरी यातायात का दबाव कम हो और प्रदूषण नियंत्रण में ठोस योगदान दिया जा सके। पानीपत िसटी विधायक प्रमोद विज के सवाल के जवाब में विज ने कहा कि शहर को अलॉट हुई 50 बसों में से 15 आ चुकी हैं। बाकी की तीन महीनों के अंदर मिल जाएंगी।

मंत्री के अनुसार, यह चरणबद्ध प्रक्रिया इसलिए अपनाई जा रही है ताकि संचालन, चार्जिंग और मेंटेनेंस की व्यवस्था को व्यवस्थित ढंग से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में रोडवेज के बेड़े में अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक बसें जोड़ना है। विज ने कहा कि प्रदेश के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम एक गंभीर समस्या बन चुका है। इलेक्ट्रिक बसों के जरिए न केवल सार्वजनिक परिवहन को आकर्षक बनाया जाएगा, बल्कि निजी वाहनों पर निर्भरता भी घटेगी।

चार्जिंग स्टेशन सबसे बड़ी चुनौती

ऊर्जा मंत्री ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग स्टेशनों की कमी है। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रिक कार और बसें तो आ गई हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन उतनी संख्या में नहीं हैं, जितनी होनी चाहिए। मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई परिवार लंबी दूरी की यात्रा पर है, तो वह हर बार घर लौटकर गाड़ी चार्ज नहीं कर सकता। ऐसे में हाईवे और प्रमुख मार्गों पर सुविधायुक्त चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य हैं।

चार्जिंग स्टेशन सिर्फ प्लग प्वाइंट नहीं होंगे

विज ने वाहन निर्माता कंपनियों को सलाह दी कि चार्जिंग स्टेशन केवल तकनीकी सुविधा तक सीमित न हों। उन्होंने कहा कि जब किसी वाहन को चार्ज होने में एक से दो घंटे का समय लगता है, तो उस दौरान यात्रियों के लिए शौचालय, रेस्ट एरिया, रेस्तरां और रिफ्रेशमेंट जैसी सुविधाएं भी होनी चाहिए। उनका तर्क था कि केवल पेट्रोल पंप पर चार्जिंग प्वाइंट बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि वहां परिवार के साथ रुके यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं नहीं होतीं।

ऊर्जा विभाग बना नोडल एजेंसी

प्रदेश में चार्जिंग नेटवर्क को तेज गति देने के लिए सरकार ने ऊर्जा विभाग को नोडल एजेंसी बनाया है। यह विभाग विभिन्न स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज कराने में लोगों को परेशानी न हो। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इस दिशा में निजी क्षेत्र और वाहन निर्माता कंपनियों के सहयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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