Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

Bose Resigns : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दिया इस्तीफा, कारणों का खुलासा नहीं

मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं; मेरे लिए इतना ही काफी

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Bose Resigns : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने आज शाम को नई दिल्ली में अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कदम पर हैरानी जताई और कहा कि बोस के इस्तीफा देने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल एवं पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आर एन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।

सत्रह नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल नियुक्त किए गए बोस ने बताया कि हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं; यह मेरे लिए पर्याप्त है। उन्होंने हालांकि अचानक इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा नहीं किया और न ही यह बताया कि क्या कोई राजनीतिक दबाव था, जिसके कारण उन्होंने यह निर्णय लिया।

Advertisement

मुख्यमंत्री बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि मुझे केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) से पता चला है कि आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस का स्थान लेंगे। बनर्जी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के ''दबाव में'' आनंद बोस को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया हो सकता है।

Advertisement

इस्तीफे के कारणों की जानकारी नहीं

उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह अचानक हुए इस घटनाक्रम से ''स्तब्ध और बेहद चिंतित'' हैं और दावा किया कि उन्हें इसके कारणों का पता नहीं है। मुझे फिलहाल उनके इस्तीफे के कारणों की जानकारी नहीं है। हालांकि, यदि बंगाल चुनाव से पहले राज्यपाल बोस पर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से राजनीतिक कारणों से दबाव डाला गया हो तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि हालांकि शाह ने उन्हें बोस की जगह रवि के आने की जानकारी दी थी, लेकिन इस मामले में उनसे परामर्श नहीं किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे सूचित किया है कि श्री आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में स्थापित परंपरा के अनुसार मुझसे परामर्श नहीं किया।

बनर्जी ने कहा कि इस तरह के कृत्य संविधान की भावना को कमजोर करते हैं और देश के संघीय ताने-बाने के आधार पर प्रहार करते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए व ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों।

Advertisement
×