BJP vs Congress : अब देश चलाना कम्प्रोजाइल्ड पीएम के बस की बात नहीं... ये क्या बोल गए राहुल गांधी
'महंगाई में जनता पिस रही, सरकार बचत का ज्ञान दे रही'... राहुल ने पीएम मोदी से पूछा- आम आदमी ही क्यों दे बलिदान
BJP vs Congress : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ‘बचत अपील’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे आर्थिक मजबूरी और सरकार की विफलता का संकेत बताते हुए केंद्र पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री हर संकट में जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं, जबकि सरकार खुद जवाबदेही से बचती रहती है।
राहुल ने कहा कि सोना न खरीदने, पेट्रोल कम इस्तेमाल करने, विदेश यात्रा टालने और खर्च घटाने जैसी बातें कोई सलाह नहीं बल्कि बिगड़ती आर्थिक स्थिति की चेतावनी हैं। यह संदेश देश की कमजोर होती अर्थव्यवस्था और सरकार की नीतिगत असफलताओं को उजागर करता है। कांग्रेस ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बचत की अपील करके उपदेश नहीं अपनी नाकामी का सबूत दिया है तथा अब देश चलाना एक ''कम्प्रोजाइल्ड'' प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदें, क्या न खरीदें, कहां जाएं, कहां न जाएं। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें।" वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाय कि जब गरीबी में आटा गीला हो रहा है तब प्रधानमंत्री मोदी देश को बचत करने का पाठ पढ़ा रहे हैं। 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध आरंभ होने के बाद इसके असर के विभिन्न पहलुओं के बारे में कांग्रेस ने आगाह किया था, लेकिन प्रधानमंत्री चुनावी प्रचार में मशगूल थे।
खड़गे ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री इस दौरान रोडशो क्यों कर रहे थे? उनका कहना है, ''अब जब चुनाव ख़त्म हैं तो देश को उपदेश दिया जा रहा है। अपनी 12 वर्षों की नाकामी का ठीकरा, देश की जनता पर मत फोड़िये, मोदी जी। गोस्वामी तुलसीदास जी ने सही कहा है: पर उपदेश कुशल बहुतेरे...।
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि युद्ध के कारण पेट्रोल और उर्वरक की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जब आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव होता है, तो संकट से निपटने के विभिन्न उपायों के बावजूद मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

