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Bihar New CM : बिहार के नए सीएम होंगे सम्राट चौधरी, सर्वसम्मति से चुने गए भाजपा विधायक दल के नेता

बिहार: सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए सम्राट चौधरी

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Bihar New CM : बिहार में मंगलवार को सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि बिहार में बनने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की नयी सरकार में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालेंगे। पटना स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित बैठक के समापन के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि निवर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन निवर्तमान मंत्री दिलीप जायसवाल और मंगल पांडेय ने किया।

विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त चौहान ने बताया कि इसके बाद उपस्थित सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से चौधरी को अपना नेता चुन लिया। अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन विधायक दल की बैठक होगी जिसमें चौधरी के नाम पर औपचारिक मुहर लगेगी। तारापुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक चौधरी ने नेता चुने जाने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। चौधरी ने एक बयान में कहा, "पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मुझ पर विश्वास जताते हुए यह दायित्व सौंपने के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा, उनके विश्वास और सपनों को साकार करने का एक पवित्र अवसर है।"

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उन्होंने कहा कि वह पूर्ण निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ जन-जन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प लेते हैं। चौधरी ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तथा पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में मैं बिहार को विकास, सुशासन और समृद्धि के नए आयामों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहूंगा।'' केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के विकास के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राज्य को 'जंगलराज' से बाहर निकालकर विकास के पथ पर आगे बढ़ाया। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्राट चौधरी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए बिहार को आगे ले जाने का कार्य करेंगे।

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पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुआ फैसला

भाजपा विधायक दल की यह अहम बैठक पटना में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में संपन्न हुई। इस बैठक में पार्टी के सभी विधायक और विधान पार्षद मौजूद रहे। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं द्वारा सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी सदस्यों ने मेज थपथपाकर एक सुर में पारित कर दिया। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और सभी विधायकों का आभार जताया। नेता चुने जाने की खबर बाहर आते ही पार्टी कार्यालय के बाहर भारी संख्या में जुटे कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं।

राजभवन में पेश करेंगे सरकार बनाने का दावा

विधायक दल का नेता चुने जाने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ राजभवन के लिए रवाना होंगे। राजभवन पहुंचकर वे राज्यपाल सैयद अता हसनैन के समक्ष नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे और विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपेंगे। राज्यपाल से औपचारिक निमंत्रण मिलने के बाद बुधवार सुबह होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां और तेज कर दी जाएंगी।

राबड़ी सरकार में पहली बार मंत्री बने थे सम्राट चौधरी

बिहार की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल करते हुए सम्राट चौधरी राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब बिहार की कमान इस दिग्गज कुशवाहा नेता के हाथ में होगी। सम्राट चौधरी का करीब तीन दशक लंबा राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव और संघर्ष वाला रहा है। उन्होंने अपने सफर में कई राजनीतिक दलों के साथ काम किया और हर जगह अपनी एक अलग छाप छोड़ी। एक साधारण विधायक से लेकर बिहार के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की उनकी कहानी काफी दिलचस्प है।

राजनीतिक परिवार से ताल्लुक और शुरुआती सफर

16 नवंबर 1968 को मुंगेर में जन्मे सम्राट चौधरी एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी भी बिहार के दिग्गज नेता रहे हैं और उन्होंने सेना में सेवा देने के बाद राजनीति में कदम रखा था। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए सम्राट चौधरी ने 1990 के दशक में राजनीति में प्रवेश किया। उनकी नेतृत्व क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में पहली बार कृषि मंत्री बन गए थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

जेडीयू से लेकर बीजेपी तक का सफर

राबड़ी सरकार के बाद सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल में कई वर्षों तक काम किया। साल 2010 में वे जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। इसके बाद 2014 में उन्होंने जीतन राम मांझी की सरकार में नगर विकास और आवास मंत्री का पद संभाला। साल 2018 उनके राजनीतिक जीवन में एक बड़ा मोड़ लेकर आया, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बीजेपी में आने के बाद उन्हें अपनी क्षमता दिखाने का एक बड़ा मंच मिला।

बीजेपी में लगातार बढ़ा कद

बीजेपी में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी का कद तेजी से बढ़ा। साल 2021 में उन्हें बिहार की एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री बनाया गया। उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली और जमीन पर मजबूत पकड़ को देखते हुए पार्टी ने 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। इसके बाद जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी की, तो सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई। अब अप्रैल 2026 में वे बिहार के पूर्णकालिक मुख्यमंत्री के रूप में नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।

माता-पिता दोनों रहे हैं विधायक, 'मुरेठा' प्रतिज्ञा के लिए भी चर्चित हैं सम्राट चौधरी

बिहार के नए मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहे सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर जितना लंबा है, उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक शैली भी उतनी ही दिलचस्प है। मुंगेर जिले के तारापुर स्थित लखनपुर गांव में 16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट को राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता शकुनी चौधरी सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद राजनीति में आए थे और सात बार विधायक रहे। इसके अलावा उनकी माता पार्वती देवी भी बिहार विधानसभा की सदस्य रही हैं। हालांकि, सम्राट ने अपनी आक्रामक कार्यशैली और जमीनी पकड़ से अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है।

कुशवाहा समाज के बड़े नेता और ओबीसी चेहरा

सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण जातिगत समीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे कोइरी (कुशवाहा) समाज से आते हैं, जो बिहार में अन्य पिछड़ा वर्ग का एक बड़ा और प्रभावशाली हिस्सा है। भारतीय जनता पार्टी ने सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाकर लव-कुश (कुर्मी और कुशवाहा) समीकरण में सेंध लगाने की सफल रणनीति अपनाई थी। नीतीश कुमार के कुर्मी समाज के मजबूत विकल्प के तौर पर बीजेपी ने सम्राट को अपना सबसे बड़ा ओबीसी चेहरा बनाया, जिसका सीधा फायदा पार्टी को बिहार के चुनावों में मिला।

'मुरेठा' की प्रतिज्ञा और राजनीतिक आक्रामकता

सम्राट चौधरी अपनी बेबाक राजनीति के साथ-साथ अपने खास पहनावे के लिए भी काफी मशहूर हैं। उनके सिर पर हमेशा एक पगड़ी या 'मुरेठा' बंधा नजर आता है। इसके पीछे एक दिलचस्प राजनीतिक प्रतिज्ञा जुड़ी है। जब नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल के साथ सरकार बनाई थी, तब सम्राट ने सार्वजनिक मंच से कसम खाई थी कि जब तक वे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटा देंगे, तब तक यह मुरेठा नहीं खोलेंगे। अब जब नीतीश इस्तीफा दे चुके हैं और सम्राट खुद सीएम बनने जा रहे हैं, तो यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि उनकी यह प्रतिज्ञा किस रूप में पूरी होती है।

कम उम्र में मंत्री बनने का रिकॉर्ड और कुशल रणनीतिकार

सम्राट चौधरी के नाम राजनीति में एक खास रिकॉर्ड भी दर्ज है। साल 1999 में जब वे राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने थे, तब उनकी उम्र काफी कम थी। उस समय उनकी उम्र को लेकर विवाद भी उठा था, लेकिन उन्होंने इसे अपने राजनीतिक सफर में रुकावट नहीं बनने दिया। वे एक कुशल संगठनकर्ता माने जाते हैं। उनके पास जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ने और विपक्ष पर सीधा एवं तीखा हमला बोलने की अद्भुत क्षमता है। इसी आक्रामक शैली और स्पष्टवादिता ने उन्हें आज बिहार के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचाया है।

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