Mann vs Chadha : पंजाब में सियासी घमासान-राघव चड्ढा पर बिफरे मुख्यमंत्री भगवंत मान, बोले-सांसद ने पार्टी लाइन छोड़ समोसे और पिज्जा को दी तरजीह
Mann vs Chadha : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच चल रही तल्खी शुक्रवार को उस समय सार्वजनिक हो गई, जब मुख्यमंत्री ने अपनी ही पार्टी के सांसद को ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (समझौतावादी) करार दे दिया।...
Mann vs Chadha : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच चल रही तल्खी शुक्रवार को उस समय सार्वजनिक हो गई, जब मुख्यमंत्री ने अपनी ही पार्टी के सांसद को ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (समझौतावादी) करार दे दिया। मुख्यमंत्री ने चड्ढा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के हितों और मर्यादा के खिलाफ जाकर काम किया है।
चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान मान उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जो राघव चड्ढा द्वारा राज्यसभा सचिवालय को लेकर दिए गए बयान से जुड़ा था। दरअसल, चड्ढा ने पार्टी के उस कदम पर सवाल उठाए थे जिसमें सचिवालय से उन्हें सदन में बोलने का समय न देने का अनुरोध किया गया था।
पार्टी व्हिप के उल्लंघन का आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य के लिए पार्टी का अनुशासन सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा, “अगर कोई सांसद उन अहम मुद्दों पर वॉकआउट नहीं करता जहाँ पार्टी ने स्पष्ट स्टैंड लिया है, तो कार्रवाई होना तय है। चाहे वह पश्चिम बंगाल में वोटों को डिलीट करने का मामला हो या गुजरात सरकार द्वारा हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने का मुद्दा, चड्ढा ने पार्टी व्हिप के विरुद्ध जाकर चुप्पी साधे रखी।”
मान ने आगे कहा कि संसद में नेतृत्व परिवर्तन कोई नई बात नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से 2019 के बीच डॉ. धर्मवीर गांधी सदन में पार्टी के नेता थे और बाद में उनकी जगह स्वयं भगवंत मान ने यह जिम्मेदारी संभाली थी।
संसद में ‘समोसे-पिज्जा’ पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने राघव चड्ढा की संसद में सक्रियता और उनके द्वारा उठाए गए विषयों पर भी तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जब पार्टी चाहती थी कि गंभीर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दों पर बात हो, तब सांसद ‘समोसे महंगे होने’ और ‘पिज्जा डिलीवरी में देरी’ जैसे विषयों पर समय व्यतीत कर रहे थे। मान के अनुसार, एक जनप्रतिनिधि से उम्मीद की जाती है कि वह सदन के कीमती समय का उपयोग जनता की समस्याओं को उठाने के लिए करे, न कि ऐसे हल्के विषयों के लिए।
फिलहाल इस विवाद ने आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को नई हवा दे दी है। मुख्यमंत्री के इन गंभीर आरोपों पर अब तक राघव चड्ढा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर यह टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।

