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Banke Bihari Temple Dispute : दर्शन टाइमिंग चेंज, देहरी पूजा बंद... बांके बिहारी मंदिर में बदली परंपराओं पर SC सख्त, HPC से मांगा जवाब

बांके बिहारी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों में छेड़छाड़ के आरोपों वाली याचिका पर समिति से जवाब तलब

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Banke Bihari Temple Dispute : सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के संचालन की देखरेख करने वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति से सोमवार को उस याचिका के मद्देनजर जवाब तलब किया, जिसमें समिति पर दर्शन का समय बदलने और पारंपरिक देहरी पूजा को बंद करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंदिर के सेवायतों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और वकील तन्वी दुबे के माध्यम से दायर याचिका पर संज्ञान लिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) ने आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ छेड़छाड़ की है।

पीठ ने अदालत की ओर से नियुक्त एचपीसी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया। उसने मुख्य याचिका और मिसेलिनियस आवेदन की सुनवाई 26 मई को सूचीबद्ध की। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "समिति के खिलाफ कुछ गंभीर आरोप लगे हैं, जिनकी हम जांच करना चाहते हैं।" पीठ ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की प्रबंधन समिति की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसका प्रतिनिधित्व वकील दुबे कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने मंदिर के आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों के सिलसिले में आदेश पारित करते समय एचपीसी की ओर से उसे हासिल व्यापक शक्तियों की व्याख्या पर चिंता जताई।

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इन आदेशों में दर्शन के समय में बदलाव, देहरी पूजा बंद किया जाना और सेवायत गोस्वामी का फूल बंगला सेवा के लिए अत्यधिक शुल्क लगाना आदि शामिल है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने मंदिर की अनूठी एवं पवित्र प्रकृति पर जोर देते हुए दलील दी कि सुबह और शाम के दर्शन का समय सदियों पुरानी परंपराओं पर आधारित है। वकील ने कहा, "मंदिर में ऐतिहासिक रूप से मौसम के अनुसार सख्त समय-सारणी का पालन किया जाता रहा है और वहां ग्रीष्म एवं शीत ऋतु के लिए अलग-अलग कार्यक्रम निर्धारित हैं, जो देवता के जागने और विश्राम सहित अन्य आंतरिक अनुष्ठानों से करीब से जुड़े हुए हैं।" वकील ने दलील दी कि सितंबर 2025 में कार्यालय ज्ञापनों के माध्यम से किए गए बदलावों ने इन आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों को बाधित किया और मंदिर की पारंपरिक पूजा प्रणाली को बदल दिया।

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याचिकाकर्ताओं ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा के हिस्से के रूप में खास तौर पर सेवायत गोस्वामी की ओर से की जाने वाली सदियों पुरानी 'देहरी पूजा' को बंद करना अनुचित था। उन्होंने कहा कि यह अनुष्ठान उस समय किया जाता था, जब मंदिर के द्वार आम जनता के लिए बंद होते हैं, ऐसे में भीड़ प्रबंधन से संबंधित कोई मुद्दा नहीं है। यह मामला उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश-2025 को लेकर चल रहे मुकदमे की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है, जिसमें मौजूदा प्रबंधन संरचना को राज्य-नियंत्रित ट्रस्ट से बदलने का प्रावधान किया गया है।

शीर्ष अदालत ने अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कानून के कुछ हिस्सों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी और मंदिर के दैनिक प्रशासन की देखरेख के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय एचपीसी का गठन किया था। न्यायालय ने 13 अप्रैल को स्पष्ट किया था कि एचपीसी मंदिर में मौजूदा धार्मिक अनुष्ठान व्यवस्थाओं में "कोई संरचनात्मक परिवर्तन" करने के लिए इच्छुक नहीं है।

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