Bangladesh Violence : बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, 24 घंटे में दूसरी घटना
Bangladesh Violence : बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और गंभीर घटना सामने आई है। नरसिंदी जिले के पलाश उपजिला स्थित चारसिंधुर बाजार में सोमवार देर रात किराना दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियार से हमला कर हत्या...
Bangladesh Violence : बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और गंभीर घटना सामने आई है। नरसिंदी जिले के पलाश उपजिला स्थित चारसिंधुर बाजार में सोमवार देर रात किराना दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। यह चौबीस घंटे के भीतर हिंदू समुदाय से जुड़े व्यक्ति की दूसरी हत्या है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब चालीस वर्षीय मोनी चक्रवर्ती सोमवार रात करीब ग्यारह बजे अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर स्थानीय रूप से बने धारदार हथियार से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल मोनी मौके पर ही गिर पड़े। स्थानीय लोग उन्हें तुरंत पलाश उपजिला स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पलाश थाना प्रभारी शहीद अल मामुन ने बताया कि मोनी चक्रवर्ती शिबपुर उपजिला के साधरचर यूनियन निवासी मदन ठाकुर के पुत्र थे और वह लंबे समय से चारसिंधुर बाजार में किराने की दुकान चला रहे थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए नरसिंदी सदर अस्पताल भेज दिया है और हमलावरों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
यह घटना उसी दिन हुई, जब खुलना डिवीजन के Jessore जिले में अड़तीस वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह केशवपुर उपजिला के अरुआ गांव के निवासी थे। यह वारदात सोमवार शाम करीब पांच बजकर पैंतालीस मिनट पर कपालिया बाजार में हुई।
हाल के हफ्तों में बढ़ीं हिंसक घटनाएं
बीते कुछ हफ्तों में हिंदू समुदाय से जुड़े कई अन्य मामलों ने भी चिंता बढ़ाई है। तीन जनवरी को खोकन चंद्र दास की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी गई और बाद में उनका शव जला दिया गया। चौबीस दिसंबर को राजबाड़ी जिले के पांगशा उपजिला में अमृत मंडल की कथित उगाही के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। अठारह दिसंबर को मैमनसिंह शहर में दीपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या कर शव जला दिया गया था।
इसके अलावा तेईस दिसंबर को चट्टोग्राम के बाहरी इलाके राउजान में कतर में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों शुख शिल और अनिल शिल के घर को आग के हवाले कर दिया गया था, हालांकि परिवार के सदस्य समय रहते बाहर निकल आए। लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

