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Asha Bhosle: सुरों की हर रंगत की आवाज खामोश, भारत की हर भावना की आवाज थीं आशा भोसले

RIP Asha Bhosle: 12,000 से ज्यादा गीत, अनगिनत शैलियों में महारत, आशा भोसले ने संगीत को दिया नया आयाम, हर दौर में खुद को किया

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आशा भोसले। फाइल फोटो पीटीआई
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RIP Asha Bhosle: मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की उम्र में आशा भोसले (Asha Bhosle) का निधन हो गया। उनके साथ भारतीय संगीत का एक ऐसा युग समाप्त हो गया, जिसकी आवाज हर मूड, हर भावना और हर पीढ़ी के साथ जुड़ी हुई थी।

उनकी आवाज में शरारत भी थी और गहराई भी ऐसी आवाज जिसने लोगों को सुबह जगाया, रात में सुकून दिया, प्यार में डुबोया और ग़म में भी साथ निभाया।

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अपनी बहन लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के साथ उन्होंने लगभग सात दशकों तक हिंदी फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। दोनों की आवाजें भारतीय उपमहाद्वीप की पहचान बन गईं।

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यह भी पढ़ें: Asha Bhosle Passes Away: मशहूर गायिका आशा भोंसले का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

हालांकि दोनों के करियर अलग-अलग पहचान रखते हैं। जहां लता मंगेशकर को पहले स्टारडम मिला, वहीं आशा भोसले ने अपनी अलग शैली और बहुमुखी प्रतिभा से खुद को स्थापित किया।

2023 में अपने 90वें जन्मदिन से पहले उन्होंने कहा था, “मेरे लिए संगीत मेरी सांस है। अगर सांस नहीं हो तो इंसान मर जाता है।”

आशा भोसले की खासियत सिर्फ उनकी लंबी पारी नहीं थी उन्होंने खुद को हर दौर में नए रूप में ढाला। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों से लेकर डिजिटल युग तक, उन्होंने हर मंच पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी।

मीना कुमारी, मधुबाला से लेकर काजोल और उर्मिला मातोंडकर तक, कई पीढ़ियों की अभिनेत्रियों को उन्होंने अपनी आवाज दी।

उनकी छवि हमेशा एक साड़ी, बिंदी और जूड़े में सजी गायिका की रही, जो 80 की उम्र के बाद भी मंच पर थिरकती नजर आईं।

1933 में जन्मी आशा भोसले को उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। उन्होंने महज 10 साल की उम्र में अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया।

करियर की शुरुआत संघर्षों से भरी रही। शुरुआत में उन्हें छोटे बजट की फिल्मों के लिए गाने मिले और अक्सर उन्हें अपनी बहन की छाया में देखा गया, लेकिन 1950 के दशक में संगीतकार ओ.पी. नैयर के साथ उनके काम ने उन्हें पहचान दिलाई। उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में एक नया अंदाज जोड़ा जोश, आधुनिकता और ग्लैमर।

इसके बाद आरडी बर्मल (R. D. Burman) के साथ उनकी साझेदारी ने संगीत को नया आयाम दिया। “पिया तू अब तो आजा” और “दम मारो दम” जैसे गीत उनकी बहुमुखी प्रतिभा के उदाहरण बने। उन्होंने ग़ज़ल (“दिल चीज़ क्या है”), पॉप, शास्त्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत में भी अपनी छाप छोड़ी।

उनकी उपलब्धियों में कई राष्ट्रीय पुरस्कार, फिल्मफेयर अवॉर्ड, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण शामिल हैं।

व्यक्तिगत जीवन में भी उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे। कम उम्र में शादी, संघर्ष, और फिर अपने दम पर करियर बनाना उनकी जिंदगी भी उतनी ही प्रेरणादायक रही जितनी उनकी गायकी।

1990 के दशक में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। उन्होंने बॉय जॉर्ज, एडनान सामी और यहां तक कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ भी गाने गाए।

उनकी संगीत यात्रा लगातार प्रयोग और बदलाव की मिसाल रही। सोशल मीडिया पर भी वह सक्रिय रहीं और नई पीढ़ी से जुड़ी रहीं। आशा भोसले सिर्फ एक गायिका नहीं थीं वह एक युग थीं, एक भावना थीं, जो हर दौर में जीवित रहेगी।

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