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Asaram's Health Condition: अदालत ने आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिए एम्स को मेडिकल बोर्ड गठित करने को कहा

Asaram's Health Condition: सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू बाबा आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति की जांच के लिए मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। आसाराम ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत...

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आसाराम। फ़ाइल फ़ोटो
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Asaram's Health Condition: सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू बाबा आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति की जांच के लिए मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। आसाराम ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत का अनुरोध किया है।

राजस्थान हाई कोर्ट ने 2013 में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 80 वर्ष से अधिक आयु के आसाराम की दोषसिद्धि और उसे सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को 27 मई को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मेडिकल बोर्ड को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि महज तीन माह पहले आसाराम ने काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्रा की। मेहता ने कहा, ''उसे इस आधार पर अंतरिम जमानत मिली थी कि वह अचेत अवस्था में है, लेकिन अब वह घूम-फिर रहा है।''

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इस पर पीठ ने कहा, ''हम नियमित जमानत नहीं दे रहे हैं। चिकित्सा आधार पर इसकी आवश्यकता है या नहीं, इस बारे में संतुष्ट होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने दीजिए।''

आसाराम की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मामले को एम्स के निदेशक के पास भेजा जा सकता है, जो विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक मेडिकल बोर्ड गठित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद मेडिकल बोर्ड अपनी रिपोर्ट देगा कि आसाराम को मरीज के रूप में अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता है या नहीं।

राजस्थान हाई कोर्ट ने मामले में आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था, लेकिन तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म तथा उसके यौन उत्पीड़न से संबंधित आरोपों से उसे बरी कर दिया था।

राजस्थान हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म से संबंधित आईपीसी की धारा 376 (2) (एफ) के तहत उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा, जिसके परिणामस्वरूप अधीनस्थ अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा भी कायम रही। हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 342 (बंधक बनाना), धारा 370(4) (मानव तस्करी), धारा 506 (आपराधिक धमकी), धारा 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) और धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) के अलावा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 तथा किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम की धारा 23 के तहत हुई दोषसिद्धि को भी बरकरार रखा था।

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