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राम रहीम की मुश्किलें फिर बढ़ीं? पत्रकार हत्याकांड में बरी किए जाने के खिलाफ SC तैयार

हत्या मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को बरी करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा न्यायालय

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Ram Rahim Case : सुप्रीम कोर्ट सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने को तैयार हो गया, जिसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक पत्रकार की 2002 में हुई हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था।

यह मामला हाईकोर्ट द्वारा सजा पलटने का है

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस मामले पर विचार करने की जरूरत है। न्यायालय ने मारे गए पत्रकार के बेटे अरिदमन की याचिका को 16 नवंबर से शुरू होने वाले हफ्ते में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। राम रहीम की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि राज्य ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कोई याचिका दायर नहीं की है। न्यायालय ने कहा कि यह मामला हाईकोर्ट द्वारा सजा पलटने का है। पीठ ने यह भी कहा कि हम इस बात से भी पूरी तरह वाकिफ हैं कि हो सकता है राज्य सरकार अपील न करे।

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महिला अनुयायियों के कथित यौन शोषण का जिक्र

डेरा प्रमुख, जिसकी उम्र 58 साल है, अभी रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। वह वहां 2017 में अपने दो अनुयायियों के साथ दुष्कर्म के मामले में मिली 20 साल की सजा काट रहा है। हरियाणा के सिरसा में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। यह घटना तब हुई जब उनके अखबार 'पूरा सच' ने एक गुमनाम चिट्ठी छापी थी, जिसमें सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में महिला अनुयायियों के कथित यौन शोषण का जिक्र था।

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बाद में छत्रपति की चोटों के कारण मौत हो गई और एक मामला दर्ज किया गया जिसमें राम रहीम को साजिशकर्ता के तौर पर नामजद किया गया। यह मामला 2006 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। जनवरी 2019 में पंचकूला की एक विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य लोगों को दोषी ठहराया था।

अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में उन्होंने हाईकोर्ट में अपनी सजा को चुनौती दी, जिसने 7 मार्च को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

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