Ankit Sharma Murder Case : सालों बाद अंकित शर्मा हत्याकांड में इंसाफ, ताहिर हुसैन-पूर्व 'आप' पार्षद सहित 5 लोगों को दोषी करार
अपराध शाखा की जांच के आधार पर पूर्व 'आप' पार्षद सहित अन्य दोषी करार- पुलिस
Ankit Sharma Murder Case : दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि आसूचना ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को दोषी ठहराया जाना अपराध शाखा की गहन जांच का नतीजा था।
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) एचजीएस धालीवाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि दिल्ली की एक अदालत ने अंकित शर्मा हत्याकांड के पांच आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 153ए (विभिन्न समुदायों के बीच धर्म, जाति, भाषा या जन्म स्थान के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना), 149 (दंगा करना), 365 (अपहरण), 149 (गैरकानूनी सभा), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना) और 147 (दंगा करने के लिए सजा) के तहत दोषी करार दिया। धालीवाल ने कहा, "इस मामले की जांच अपराध शाखा ने की थी। यह उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक था। अपराध शाखा की गहन जांच के आधार पर ही आरोपियों को दोषी ठहराया गया।"
उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश की विस्तृत प्रति मिलने के बाद पुलिस और जानकारी देगी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में 'आप' के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, नजीम, कासिम और समीर खान को सोमवार को दोषी करार दिया। अदालत 11 आरोपियों के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही थी, जिनमें से पांच को उसने दोषी ठहराया। यह मामला दयालपुर पुलिस थाने में शर्मा के पिता रविंद्र कुमार की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी पर आधारित था। शिकायत के मुताबिक, आईबी में तैनात शर्मा 25 फरवरी 2020 को दफ्तर से घर लौटे थे और उसके बाद फिर बाहर निकले थे।
इसमें कहा गया था कि जब शर्मा वापस नहीं आए, तो परिजन ने उनकी तलाश शुरू की और बाद में पता चला कि उनकी हत्या कर दी गई है। शर्मा का शव चांद बाग पुलिया इलाके में एक मस्जिद के पास खजूरी खास नाले से बरामद हुआ था। यह वारदात फरवरी 2020 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के समय हुई थी। इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।

