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Nepal Flood Relief: नेपाल बाढ़ में 626 मौतें, 2 हजार लापता; भारत ने भेजी 11 सदस्यीय राहत टीम

India Nepal Flood Relief: नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजी गई टीम में चिकित्साकर्मी और बचाव विशेषज्ञ शामिल; भारत से 42 बेली ब्रिज के लिए भी मांगी मदद

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नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली में सेना के ट्रेनिंग सेंटर 'मैथाली बैरक' में हल्की बारिश के बीच, नेपाल सेना के जवान अचानक आई बाढ़ और मडस्लाइड से प्रभावित इलाकों में भेजने के लिए हेलीकॉप्टर में राहत सामग्री लोड कर रहे हैं। रॉयटर्स
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India Nepal Flood Relief: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय टीम शनिवार को काठमांडू पहुंची। इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता हैं।

भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, नेपाल सरकार के अनुरोध पर इस टीम को भेजा गया है, जिसमें चिकित्साकर्मी और बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम को नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

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बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के कारण 500 से अधिक लोगों की जान चली गई और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा जलविद्युत बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है।

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नेपाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपने सुरक्षाबलों की अधिकतम तैनाती को ''प्राथमिकता'' देना चाहता है, जो स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार उन जटिल मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने के लिए तैयार है, जहां अत्यंत कठिन संरचनाओं के लिए विशेष तकनीकी कौशल की आवश्यकता है।

नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 'बेली ब्रिज' बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल ऐसे होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।

बचाव अभियान जारी रहने के बीच 163 विदेशियों समेत करीब 2,500 लोगों को निकाला गया

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जारी तलाश एवं राहत अभियानों के तहत बचाव टीम ने फंसे 163 विदेशियों सहित लगभग 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। इस आपदा में 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के कारण जनहानि के साथ-साथ मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता हैं।

खोज एवं बचाव अभियानों के लिए नेपाल सेना के 5,000 से अधिक जवानों सहित 11,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार, अब तक 163 विदेशी नागरिक समेत 2,465 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

इन विदेशियों में 113 भारतीय, 26 चीनी, 15 दक्षिण कोरियाई, चार जर्मन, इटली और अमेरिका के दो-दो तथा ओमान का एक नागरिक शामिल हैं। निदेशालय ने बताया कि त्रिशूली और रसुवा की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को निकाला गया। सुरक्षित निकाले गए लोगों में से 2,265 को हेलीकॉप्टर के माध्यम से, जबकि 200 लोगों को जमीनी रास्तों से बाहर लाया गया।

धुंचे और त्रिशूली में स्थापित आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्रों में बाढ़ प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए 1,706 लोगों को अब तक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है। इस बीच, नेपाल पुलिस ने एक सूचना में बताया कि राजधानी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख जमीनी मार्ग, मुगलिंग-काठमांडू राजमार्ग शनिवार को फिर से चालू हो गया। बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण यह रास्ता बुधवार से बंद था।

नेपाल पुलिस ने कहा कि स्थिति का आकलन करने के बाद राजमार्ग पर आवागमन फिर से शुरू कर दिया गया है और वाहनों को धीरे-धीरे उनके गंतव्य की ओर जाने की अनुमति दी जा रही है। इससे कई दिनों से राजमार्ग पर फंसे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण पिछले चार दिन से मध्य नेपाल में राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य प्रमुख सड़क के कुछ हिस्से अवरूद्ध थे।

इस बीच, शुक्रवार रात तक प्रधानमंत्री आपददा राहत कोष में 2.295 अरब रुपये से अधिक की राशि एकत्र हो चुकी है। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, कोष को बुधवार दोपहर से बृहस्पतिवार मध्यरात्रि तक 36 घंटे के भीतर 1.91 अरब रुपये मिले, जबकि अकेले शुक्रवार को 38.55 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दान की गई। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह राशि 10 विभिन्न वाणिज्यिक बैंक के खातों में जमा की गई है।

नेपाल-चीन सीमा पर बहने वाली भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ आने के बाद सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया था। इस फैसले के बाद विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों ने कोष में दान दिया। हालिया योगदान के बाद, कोष में राशि बढ़कर 4.09 अरब रुपये हो गया है जो पहले 2.17 अरब रुपये थी।

सरकार ने वित्त मंत्रालय को राहत कोष में अंशदान एकत्र करने और सहायता समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय नामित किया है। वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के सचिवालय के अनुसार, वे संस्थागत दाताओं से एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के योगदान को व्यक्तिगत रूप से स्वीकार कर रहे हैं। सचिवालय ने कहा कि व्यक्तिगत दानदाता स्वयं मंत्रालय जाकर नकद योगदान दे सकते हैं। भाषा खारी रंजन

नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 626 हुई

मध्य नेपाल में और शव बरामद होने के बाद अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है जबकि आपदा के बाद करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, हिमालयी देश के आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं।

एनडीआरआरएमए के मुताबिक, चितवन से 233, नवलपरासी पूर्वी से 158, नुवाकोट से 51, गोरखा से 48, नवलपरासी पश्चिम से 47, धादिंग से 45, तनहूं से 31 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई।

इससे लोगों की जान जाने के साथ ही बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल में बचाव दलों ने शनिवार को अभियान के चौथे दिन करीब 2,500 फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। खोज और राहत अभियान लगातार जारी है। एनडीआरआरएमए ने शुक्रवार को कहा था कि अचानक आई बाढ़ वाले क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से एक और बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।

नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद हिमाचल के ऊना का इंजीनियर लापता

हिमाचल के ऊना जिले के रहने वाले सुखविंदर नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद से लापता हैं। वह नेपाल में त्रिशूली पन बिजली परियोजना में मैकेनिकल इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। बुधवार को नेपाल के रसुवा और दूसरे जिलों में अचानक आई बाढ़ के बाद से ही सुखविंदर का परिवार उनसे संपर्क करने और उन्हें खोजने की लगातार कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई कामयाबी नहीं मिली है। इससे परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है।

परिवार ने अपने बेटे को खोजने के लिए केंद्र सरकार और स्थानीय सांसद अनुराग ठाकुर से संपर्क किया है। सुखविंदर के पिता हुसन लाल ने शनिवार को बताया कि उनका बेटा पहले भूटान में काम करता था, जिसके बाद कंपनी ने उसका तबादला नेपाल कर दिया था। सुखविंदर तीन महीने की छुट्टी के बाद 15 अगस्त को नेपाल लौटे थे। हुसन लाल के मुताबिक, उनका एक भतीजा भी काठमांडू में रहता है। वह उसके संपर्क में तो हैं, लेकिन सुखविंदर का कोई सुराग नहीं मिल रहा है।

दुबई में रहने वाला उनका बड़ा बेटा भी अपने भाई को खोजने के लिए काठमांडू पहुंच गया है और जानकारी जुटा रहा है। सुखविंदर शादीशुदा हैं और उनका 18 महीने का बेटा है। ऊना के एसडीएम अभिषेक मित्तल ने बताया कि सुखविंदर के लापता होने की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है और संबंधित मंत्रालय से भी संपर्क किया गया है।

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद असम के 10 लोग लापता

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से असम के 10 लोगों के लापता होने की सूचना है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने बताया कि लापता लोगों में से तीन-तीन कामरूप (मेट्रो) और कर्बी आंगलोंग से, दो नलबाड़ी से तथा एक-एक गोलाघाट और होजाई जिलों से हैं। इससे पहले एएसडीएमए ने कहा कि नेपाल बाढ़ में राज्य के 12 लोग लापता थे। बाद में उसने कहा कि नलबाड़ी के दो लोगों के परिजनों ने पुष्टि की है कि वे सुरक्षित हैं।

कर्बी आंगलोंग प्रशासन ने कहा कि जिले के लापता तीन लोगों में से एक के परिजनों ने उसके सुरक्षित होने की पुष्टि की है, लेकिन एएसडीएमए द्वारा उसके सुरक्षित होने की पुष्टि किया जाना अभी बाकी है। एएसडीएमए बुलेटिन में कहा गया है कि लापता लोगों में कामरूप (मेट्रो) के गुवाहाटी निवासी डॉ. दीपाली सरकार, पंकज नियोग और मानस कुमार घोष; कर्बी आंगलोंग से ऋतुपर्णो ब्रह्मा, मोंत्री बसुमतारी और सोमेश्वर नर्ज़ारी; नलबाड़ी से अरुण नाथ और डॉ. तीर्थ चालिहा; गोलाघाट से राहुल दैमारी और होजाई से शतदल नाथ शामिल हैं।

राज्य सरकार ने नयी दिल्ली स्थित असम भवन में बाढ़ से संबंधित एक आपातकालीन हेल्प डेस्क स्थापित किया है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इससे लोगों की जान जाने के साथ ही बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। मध्य नेपाल में और शव बरामद होने के बाद अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है जबकि आपदा के बाद करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं।

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