हिमाचल में दूध के दाम बढ़ाने की बातों के बीच पशुपालक परेशान, 3-4 महीने से भुगतान का इंतजार
शिमला के ढाकगांव पंचायत के पशुपालकों का आरोप- दूध की सप्लाई लेने के बाद भी नहीं मिला भुगतान; पंचायत प्रधान संगीता खुराना ने मिल्क फेडरेशन से मांगा जवाब
हिमाचल प्रदेश में एक ओर प्रदेश सरकार खासकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पशुपालकों को राहत देने और दूध के दाम बढ़ाने की बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर शिमला जिला के चिड़गांव क्षेत्र की ग्राम पंचायत ढाकगांव के कई पशुपालक पिछले 3–4 महीनों से अपने दूध के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। पंचायत प्रधान ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार और संबंधित विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
युवा पंचायत प्रधान संगीता खुराना के अनुसार, क्षेत्र के पशुपालक प्रतिदिन सुबह-शाम कड़ी मेहनत कर दूध सरकार को उपलब्ध करवाते हैं। पशुपालन उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में सरकार द्वारा दूध की सप्लाई लेने के बाद भुगतान में महीनों की देरी होना उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी कर रहा है और इससे सरकार का आर्थिक दिवालियापन भी साफ नजर आ रहा है।
प्रधान ने कहा कि सरकार द्वारा दूध के रेट बढ़ाने की घोषणा तभी सार्थक होगी, जब पशुपालकों को उनके दूध की कीमत समय पर और नियमित रूप से मिलेगी। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि जब पशुपालक लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तो उनके भुगतान में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है?
संगीता खुराना ने हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन से मांग की है कि ढाकगांव पंचायत में लंबित दूध भुगतानों की तत्काल समीक्षा की जाए और प्रत्येक पात्र पशुपालक का बकाया भुगतान जल्द जारी किया जाए। साथ ही भुगतान में देरी के कारणों को भी स्पष्ट किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
प्रधान ने कहा कि पशुपालकों की मेहनत का सम्मान केवल रेट बढ़ाने की घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनकी मेहनत की कमाई समय पर उनके हाथों तक पहुंचाने से होगा। उन्होंने सरकार से मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।

