Ambala Triple Murder : अम्बाला में पारिवारिक विवाद का खूनी अंत, खेत की मिट्टी और रिटायरमेंट के पैसों के विवाद में तिहरा हत्याकांड, पोते ने दादी, भाई और चाचा को गोलियों से भूना
हमले में चाची गंभीर रूप से घायल, चंडीगढ़ रेफर; 16 लाख रुपये और मिट्टी के ठेके को लेकर चल रही थी कलह, वारदात के बाद से फार्मेसी छात्र आरोपी फरार
Ambala Triple Murder : अम्बाला जिले के शहजादपुर खंड के गांव बिचपड़ी में शनिवार शाम एक पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। खेत की मिट्टी के ठेके और पिता के रिटायरमेंट के पैसों को लेकर हुए विवाद में 22 वर्षीय फार्मेसी छात्र अभिषेक ने अपनी 95 वर्षीय दादी इसरो देवी, बड़े भाई संदीप (40) और चाचा महिंद्र पाल (50) की गोली मारकर हत्या कर दी। इस हमले में आरोपी की चाची सुनीता (45) भी गंभीर रूप से घायल हुई हैं, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
शाम 5:30 बजे दिया वारदात को अंजाम
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5:30 बजे परिवार में पैसों को लेकर तीखी बहस हुई थी। विवाद इतना बढ़ गया कि अभिषेक ने तैश में आकर फायरिंग शुरू कर दी। उसने सबसे पहले अपनी दादी को गोली मारी, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उसने बीच-बचाव करने आए बड़े भाई, चाचा और चाची पर भी गोलियां बरसा दीं। भाई और चाचा को सिर के पीछे, जबकि चाची को आंख के नीचे गोली लगी है।
अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम, पुलिस कर रही तलाश
फायरिंग के बाद घायलों को शहजादपुर के सरकारी अस्पताल (सीएचसी) ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें चंडीगढ़ रेफर कर दिया। प्राप्त सूचना के अनुसार, रास्ते में ही बड़े भाई संदीप और चाचा महिंद्र पाल ने दम तोड़ दिया। वहीं, चाची सुनीता का इलाज चल रहा है और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही शहजादपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण कर सबूत जुटाए हैं और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।
खेत की मिट्टी और पिता के फंड को लेकर था कलह
आरोपी अभिषेक पंचकूला के एक कॉलेज से फार्मेसी सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा है। उसके पिता सतबीर सिंह स्वास्थ्य विभाग पंचकूला से 2024 में सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके बाद उन्हें करीब 16 लाख रुपये का फंड मिला था। इसके अलावा परिवार की ढाई एकड़ जमीन से खेत की मिट्टी उठाने का सौदा भी हुआ था। अभिषेक चाहता था कि मिट्टी और रिटायरमेंट का पैसा उसे व उसके पिता को मिले, जबकि बड़ा भाई संदीप इसका विरोध करता था। चाचा महिंद्र हमेशा संदीप का साथ देते थे, जिनकी अपनी कोई संतान नहीं है। अभिषेक के पिता के अनुसार, आरोपी विदेश (ऑस्ट्रेलिया) भी जाना चाहता था, लेकिन उसका वीजा रिफ्यूज हो गया था। इन्हीं पारिवारिक रंजिशों के चलते यह खौफनाक वारदात घटी।
