Cross-border Tribute : लाहौर के ऐचिसन कॉलेज में पूर्व सीएम हरचरण सिंह बराड़ के नाम पर होगा क्लासरूम
पाकिस्तानी उद्योगपति और बराड़ के बालसखा सैयद बाबर अली अपने 100वें जन्मदिन पर समर्पित करेंगे क्लासरूम
Cross-border Tribute : पाकिस्तान के लाहौर स्थित प्रतिष्ठित ऐचिसन कॉलेज में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ के नाम पर एक क्लासरूम का नाम रखा जाएगा। यह पहल उनके करीबी दोस्त और पाकिस्तान के जाने-माने उद्योगपति व परोपकारी सैयद बाबर अली ने की है। भारत के एक राजनेता को पाकिस्तान के शीर्ष शैक्षणिक संस्थान में मिलने वाला यह सम्मान दोनों देशों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह उस निजी जुड़ाव को भी दर्शाता है जिसने विभाजन की त्रासदी को झेला और दशकों तक कायम रहा।
100वें जन्मदिन पर दोस्त को खास श्रद्धांजलि
पूर्व मुख्यमंत्री के पोते तेगबीर सिंह बराड़ ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया, "मेरे दादा जी और बाबर अंकल सगे भाइयों की तरह थे। सैयद बाबर अली का 100वां जन्मदिन 30 जून को है, लेकिन मुहर्रम के साथ तिथियों के टकराव के कारण समारोह 7 जून को ही आयोजित किए जा रहे हैं। इसी उपलक्ष्य में बाबर अंकल मेरे दादा की याद में ऐचिसन कॉलेज में एक क्लासरूम समर्पित कर रहे हैं।"
अगस्त 1995 से नवंबर 1996 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस नेता हरचरण सिंह बराड़ श्री मुक्तसर साहिब जिले के सरायनागा गांव के रहने वाले थे। विभाजन से पहले उन्होंने इसी ऐचिसन कॉलेज से पढ़ाई की थी, जिसने कई प्रमुख राजनेताओं, नौकरशाहों और कारोबारियों को शिक्षा दी है।
समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान पहुंचीं बेटी
यह पहल न केवल बराड़ के इस संस्थान से जुड़ाव का प्रतीक है, बल्कि सैयद बाबर अली के साथ उनकी जीवन भर की दोस्ती को भी सलाम है। पूर्व सीएम की बेटी बबली बराड़ सैयद बाबर अली के शताब्दी वर्ष समारोह का हिस्सा बनने के लिए पहले ही पाकिस्तान रवाना हो चुकी हैं।
ऐचिसन कॉलेज के मानद दूत तरनजीत सिंह बुटालिया ने बताया, "क्लासरूम का समर्पण समारोह बुधवार (10 जून) शाम 5 बजे लाहौर के ऐचिसन कॉलेज में होगा। मैं भी इसमें शामिल होऊंगा।" इस समारोह में पाकिस्तान के शैक्षणिक, व्यावसायिक और सार्वजनिक जीवन के कई प्रमुख चेहरों के शामिल होने की उम्मीद है।
'धर्म कभी हमारी दोस्ती के आड़े नहीं आया'
एक वीडियो साक्षात्कार में सैयद बाबर अली ने ऐचिसन कॉलेज के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह तीसरी कक्षा में स्कूल आए, तो वह 'सेक्शन ए' में थे जबकि हरचरण 'सेक्शन बी' में थे। अगले साल दोनों 'कक्षा 4-ए' में आ गए और पक्के दोस्त बन गए।
अली ने कहा, "हरचरण पढ़ाई में अच्छे थे और मैं भी बुरा नहीं था। हमारी सोच एक जैसी थी। वह गुरुद्वारे जाते थे और मैं मस्जिद, लेकिन ये बातें हमारी दोस्ती के बीच कभी नहीं आईं। हम दोनों पंजाबी बोलते थे। हरचरण एक बोर्डर थे और मैं डे-स्कॉलर, फिर भी हम करीब रहे।"
उन्होंने बताया कि हरचरण को उर्दू का बहुत शौक था और वह घर पर अपनी मां को खत भी इसी भाषा में लिखते थे। सितंबर 2009 में अंतिम सांस लेने वाले हरचरण सिंह बराड़ 1936 से 1943 तक ऐचिसन कॉलेज में पढ़े थे। वह स्कूल के प्रीफेक्ट थे और उन्हें रिवाज़ गोल्ड मेडल मिला था। पंजाब का मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्होंने ओडिशा और हरियाणा के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दी थीं।
