Air India Phuket-Delhi Flight Probe : फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना पर जांच पूरी होने तक टिप्पणी नहीं करेगी एयर इंडिया
4 अगस्त को उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में करीब 300 फीट की कमी आई थी; एएआईबी की जांच जारी, दोनों पायलट ड्यूटी से हटाए गए
Air India Phuket-Delhi Flight Probe : एयर इंडिया ने फुकेत-दिल्ली उड़ान के दौरान हुई घटना की जांच को लेकर किसी भी निष्कर्ष या टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। एयरलाइन ने कहा कि मामले की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के अनुबंध-13 के तहत कर रहा है। जांच पूरी होने तक एयर इंडिया इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं करेगी और संबंधित अधिकारियों को पूरा सहयोग देती रहेगी।
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि जांच प्रक्रिया जारी होने के कारण एयरलाइन जांच के किसी निष्कर्ष या अवलोकन पर टिप्पणी नहीं कर सकती। विमान निर्माता एयरबस ने भी कहा है कि वह आईसीएओ के अनुबंध-13 के तहत जांच अधिकारियों को तकनीकी सहायता दे रहा है। कंपनी ने जांच में सहयोग के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेजने की बात कही है।
उड़ान के दौरान 300 फीट कम हुई थी ऊंचाई
यह घटना 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में हुई थी। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक करीब 300 फीट की कमी आई। इसके बाद विमान स्थिर हो गया और सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतर गया। एएआईबी ने इस घटना को ‘गंभीर घटना’ (सीरियस इंसिडेंट) के रूप में जांच के दायरे में लिया है। विमान में तीन शिशुओं समेत 137 यात्री और दो पायलट तथा छह केबिन क्रू सहित आठ चालक दल के सदस्य सवार थे। घटना के दौरान कुछ यात्रियों और केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने की सूचना थी।
मानक प्रक्रिया के तहत दोनों पायलटों का साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच के लिए परीक्षण किया गया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, पायलट-इन-कमांड के परीक्षण का परिणाम ऐसा आया, जिसके लिए पुष्टिकरण जांच जरूरी थी। नमूने निर्धारित प्रयोगशाला भेजे गए हैं और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
जांच पूरी होने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट आने तक डीजीसीए ने दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि जांच और पुष्टिकरण जांच के परिणाम के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दोष तय करना जांच का उद्देश्य नहीं
आईसीएओ के अनुबंध-13 के तहत विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की जांच का उद्देश्य घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की जवाबदेही या कानूनी दायित्व तय करना नहीं है।
नियमों के तहत घटना के 30 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट जारी करने का प्रावधान है। अंतिम रिपोर्ट जांच पूरी होने के बाद जल्द से जल्द या 12 महीने के भीतर जारी की जाती है। इसमें जांच के निष्कर्ष, कारण या घटना में योगदान देने वाले कारकों के साथ सुरक्षा संबंधी सिफारिशें भी शामिल हो सकती हैं।

