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Air India Immigration Lapse : बिना इमिग्रेशन के तीन इतालवी नागरिक आई-टू-आई क्षेत्र में कैसे पहुंचे?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया से पूछे नौ सवाल, बोर्डिंग पास से लेकर यात्री मिलान और निगरानी तक मांगा जवाब

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Air India Immigration Lapse :  अमृतसर से दिल्ली होते हुए म्यूनिख गए तीन इतालवी नागरिकों को अनिवार्य प्रस्थान इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए बिना अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार होने देने के मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया से नौ सवाल पूछे हैं। मंत्रालय ने जानना चाहा है कि ‘D’ बोर्डिंग पास वाले यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट के इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल (आई-टू-आई) ट्रांसफर क्षेत्र में कैसे पहुंचने दिया गया और उन्हें वहां किसने पहुंचाया।

मंत्रालय ने 12 सितंबर को जारी कारण बताओ नोटिस में एयर इंडिया से यात्रियों की अमृतसर से रवानगी से लेकर दिल्ली में उनके रूट, एयर इंडिया और एसएटीएस कर्मियों की भूमिका, यात्री अलगाव, इमिग्रेशन रिकॉर्ड और पर्यवेक्षण व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगे हैं।

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अमृतसर में ही जारी हुआ था लुफ्थांसा का बोर्डिंग पास

तीनों यात्री चार सितंबर को रात 12.50 बजे एयर इंडिया की उड़ान AI1115 से अमृतसर से दिल्ली पहुंचे। मंत्रालय के अनुसार, स्वीकृत हब-एंड-स्पोक एसओपी के तहत उनके पास ‘D’ यानी घरेलू बोर्डिंग पास थे। उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट के इमिग्रेशन क्षेत्र में निर्धारित गेट 39 से बाहर निकलकर अनिवार्य प्रस्थान इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी थी। इसके बाद उन्हें म्यूनिख जाने वाली लुफ्थांसा की उड़ान में सवार होना था।

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हालांकि, मंत्रालय के अनुसार ऐसा नहीं हुआ। यात्रियों को आई-टू-आई ट्रांसफर क्षेत्र में ले जाया गया। वहां से वे प्रस्थान क्षेत्र में पहुंच गए और चार सितंबर को सुबह 1.45 बजे लुफ्थांसा की उड़ान LH763 से म्यूनिख रवाना हो गए। उनके पास भारत से प्रस्थान के लिए अनिवार्य इमिग्रेशन क्लीयरेंस नहीं था।

मंत्रालय ने यह भी पूछा है कि अमृतसर में लुफ्थांसा की आगे की उड़ान का बोर्डिंग पास क्यों जारी किया गया, जबकि हब-एंड-स्पोक एसओपी के तहत स्पोक एयरपोर्ट पर आगे की उड़ान का बोर्डिंग पास जारी करने का प्रावधान नहीं था।

किसकी थी जिम्मेदारी, चूक का पता बाद में क्यों चला?

नोटिस में एयर इंडिया और एसएटीएस के उन कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारी का ब्योरा मांगा गया है, जिन्होंने यात्रियों को संभाला और उन्हें आई-टू-आई क्षेत्र तक पहुंचाया। एयरलाइन के नामित एयरलाइन नोडल अधिकारी और उस समय मौजूद पर्यवेक्षण व्यवस्था पर भी मंत्रालय ने सवाल उठाया है।

एसओपी के तहत एयरलाइनों को हब और स्पोक एयरपोर्ट पर 24 घंटे नोडल अधिकारी और सहायक टीम उपलब्ध रखनी होती है, ताकि कोई यात्री निर्धारित इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए बिना देश से बाहर न जा सके।

मंत्रालय ने यह भी पूछा है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का अनिवार्य मिलान समय पर क्यों नहीं किया गया। इसके अलावा जनरल डिक्लेरेशन, यात्री मैनिफेस्ट, एपीआई/पीएनआर और अन्य यात्री सूचनाएं इमिग्रेशन अधिकारियों को समय पर दी गई थीं या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।

सबसे अहम सवाल यह है कि निर्धारित नियंत्रणों के जरिए यात्रियों के उड़ान भरने से पहले ही इस चूक का पता क्यों नहीं चला और बाद में मैनुअल मिलान के दौरान ही इसका खुलासा क्यों हुआ।

मंत्रालय ने एयर इंडिया को नोटिस प्राप्त होने के सात दिन के भीतर लिखित जवाब और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। तय समय में जवाब नहीं देने पर मंत्रालय उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई करेगा और प्रशासनिक या नियामकीय कार्रवाई पर विचार कर सकता है।

मामला अब इस बात की जांच तक पहुंच गया है कि हब-एंड-स्पोक व्यवस्था में बोर्डिंग पास जारी करने से लेकर यात्री अलगाव, रूटिंग, पहचान सत्यापन, इमिग्रेशन, एयरलाइन पर्यवेक्षण, यात्री मिलान और सूचना साझा करने तक की कई प्रक्रियाएं एक साथ कैसे विफल हुईं। मंत्रालय यह भी जानना चाहता है कि यात्रियों के देश से बाहर जाने के बाद ही इस चूक का पता क्यों चला।

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