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AI Bird Census: अब हर उड़ान होगी रिकॉर्ड, सुल्तानपुर में एआई और ड्रोन से होगा बर्ड सेंसस

AI Bird Census: हरियाणा में पहली बार तकनीक आधारित पक्षी गणना और सालभर निगरानी की तैयारी

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AI Bird Census: सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब पक्षियों की मौजूदगी केवल कुछ घंटों की गणना या फील्ड नोट्स तक सीमित नहीं रहेगी। हरियाणा पहली बार ऐसी तकनीक आधारित बर्ड सेंसस प्रणाली शुरू करने जा रहा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कैमरे और ड्रोन मिलकर सालभर पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

इसका मकसद केवल यह जानना नहीं होगा कि कितने पक्षी आए, बल्कि यह समझना भी होगा कि वे कब पहुंचे, किन हिस्सों में रुके, कितने समय तक रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। प्रवासी मौसम शुरू होने से पहले यह व्यवस्था सक्रिय किए जाने की तैयारी है ताकि इस साल आने वाले प्रवासी पक्षियों का पहला डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।

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कुछ घंटों की गिनती से सालभर की निगरानी तक

अब तक होने वाली पक्षी गणना मुख्य रूप से सीमित समय की फील्ड विजिट और प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। नई प्रणाली इस मॉडल को बदलने जा रही है। सुल्तानपुर में दो रणनीतिक स्थानों पर बने वॉच टावरों पर एआई समर्थित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकॉर्ड करेंगे। इससे एक दिन के आंकड़ों की जगह कई सप्ताह और पूरे मौसम का व्यवहारिक डेटा तैयार होगा। कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। इसका लगातार विश्लेषण संभव होगा।

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कैमरा सिर्फ पहचान नहीं करेगा, बदलाव भी पढ़ेगा

नई तकनीक का बड़ा पहलू यह है कि यह केवल पक्षियों की संख्या दर्ज नहीं करेगी। एआई सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकॉर्ड करेगा। बार-हेडेड गूज, नॉर्दर्न पिंटेल, स्पूनबिल जैसी प्रवासी प्रजातियों की मौजूदगी के साथ यह भी देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। यदि किसी क्षेत्र में लगातार पक्षियों की मौजूदगी घटती दिखाई देती है तो यह संरक्षण प्रबंधन के लिए शुरुआती संकेत बन सकता है।

जहां इंसान नहीं पहुंचते, वहां ड्रोन करेंगे सर्वे

पारंपरिक गणना की एक चुनौती हमेशा ऐसे क्षेत्र रहे हैं जहां पहुंचना कठिन होता है। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। नई व्यवस्था में ड्रोन तकनीक को इसी अंतर को भरने के लिए शामिल किया गया है। ड्रोन ऊंचाई से उन हिस्सों का सर्वे करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकॉर्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआई विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है।

तीन साल के आंकड़े दे रहे बदलती तस्वीर के संकेत

सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान हर साल 250 से अधिक पक्षी प्रजातियों का स्वागत करता है। इनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। लेकिन हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 की एशियन वॉटरबर्ड गणना में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए। 2024 में 43 प्रजातियों के साथ संख्या 2,686 रही थी। वहीं 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे। यह उतार-चढ़ाव विशेषज्ञों के लिए संकेत है कि केवल गिनती पर्याप्त नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निगरानी की जरूरत बढ़ रही है।

माइग्रेशन का नया डेटा बैंक बनेगा सुल्तानपुर

अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी के जरिए हर साल के आंकड़ों की तुलना संभव होगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, देर से आने वाला मानसून, गर्म सर्दियां, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। सुल्तानपुर की यह पहल केवल बर्ड सेंसस नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ऐसे मॉडल के रूप में देखा जा रहा है जो आने वाले समय में संरक्षण को अनुमान नहीं, बल्कि लगातार जुटने वाले डेटा के आधार पर दिशा देगा।

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