किसानों को आजादी देंगे कृषि सुधार

किसानों को आजादी देंगे कृषि सुधार

विभा शर्मा/ ट्रिन्यू

नयी दिल्ली, 22 सितंबर

केंद्र में सत्ता संभालने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को अपने किसी फैसले को लेकर ऐसे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विवादों में घिरे 3 कृषि सुधारों को लेकर किसानों की आशंकाओं पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्रिब्यून के साथ इंटरव्यू में जवाब दिये।

किसान कह रहे हैं कि केंद्र उन्हें कॉर्पोरेट्स की दया पर छोड़ रहा है, इस प्रश्न पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा, कांग्रेस और विपक्ष किसानों को भ्रमित करने के लिए यह झूठ फैला रहा है। कृषक सशक्तीकरण व संरक्षण विधेयक में बिजाई के वक्त करार का प्रावधान है, जिसमें मूल्य के साथ ही प्रतिशत भी तय होगा जो बिक्री के वक्त कीमत बढ़ने के मामले में किसान को मिलेगा। प्राकृतिक आपदा के मामले में खरीदार भुगतान करेगा। करार सिर्फ उपज के लिए होगा, किसान की जमीन सुरक्षित रहेगी। किसान के पास करार से बाहर निकलने की आजादी भी होगी। विवाद की स्थिति में एसडीएम को 30 दिनों में फैसला सुनाना होगा।

फसल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए यदि खरीदार उसे खरीदने से मना कर दे तो क्या होगा? इस पर तोमर ने कहा, वह ऐसा नहीं कर सकता। उपज की मात्रा, उसकी लागत, कौन-सी खाद व कीटनाशकों का कितना इस्तेमाल होगा, यह सब करार में शामिल होगा। कृषि मंत्री ने कहा, आपत्ति तो कॉर्पोरेट्स की तरफ से आनी चाहिये कि उनके लिए कानूनी बाध्यताएं हैं, जबकि किसान को पूरी आजादी मिल रही है।

कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये कानून एपीएमसी या आढ़तियों के खिलाफ नहीं हैं। किसान अपनी मर्जी से कहीं भी अपनी फसल बेच सकेंगे। इसी तरह आढ़ती भी देश में कहीं भी अपने पैन-कार्ड का इस्तेमाल करते हुए बिना लाइसेंस ट्रेडिंग कर सकेंगे। कृषि मंत्री ने किसानों को यह आश्वासन भी दिया कि उनकी कोई सब्सिडी नहीं रुकेगी, न्यूनतम समर्थन मूल्य बरकरार रहेगा। किसानों को विकल्प मिलेंगे। यह अंतत: कृषि क्षेत्र की विकास क्षमता को वर्षों से अवरुद्ध करने और किसानों का शोषण करने वाले बिचौलियों को दूर करेगा।

अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा क्यों दिया? क्या उनसे और सरकार से जुड़े अन्य हितधारकों से परामर्श नहीं किया गया था? इस सवाल पर कृषि मंत्री ने कहा, इन कदमों की घोषणा कल नहीं की गयी है। ये दरअसल ऐसे कदम हैं, जो गहन विचार-विमर्श के बाद उठाए गये हैं, ताकि किसान सशक्त हो सकें। अत: किसी को भी भरोसे में नहीं लेने का सवाल ही नहीं उठता।

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें

ज़रूर पढ़ें

शहर

View All