Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

एएफटीपीएस बेंगलुरु में दीक्षांत समारोह... आसमान के नए 'सिकंदर': 48 हफ्ते की कड़ी तपस्या के बाद देश को मिले 17 जांबाज टेस्ट पायलट

वायुसेना प्रमुख ने नव-स्नातक अधिकारियों को सौंपा आत्मनिर्भरता का अहम टास्क, अब स्वदेशी रक्षा तकनीक को मिलेगी नई उड़ान

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
प्रतीकात्मक चित्र
Advertisement

Flight Test Course : बेंगलुरु स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल में शनिवार को 48वें उड़ान परीक्षण कोर्स का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। पूरे 48 सप्ताह का बहु-विषयक और बेहद कड़ा प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 11 टेस्ट पायलट और छह फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर ग्रेजुएट हुए। इस बैच में कुल 17 अधिकारी शामिल हैं, जिनमें भारतीय वायुसेना के 14, भारतीय सेना का एक और भारतीय नौसेना के दो अधिकारी शामिल हैं। यह सभी होनहार अधिकारी अब भारतीय वायुसेना की प्रमुख इकाइयों में से एक, विमान और प्रणाली परीक्षण प्रतिष्ठान की एविएशन विंग का हिस्सा बनेंगे और देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने में अपना योगदान देंगे।

मेधावियों ने झटके प्रतिष्ठित पुरस्कार

इस खास मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। दिलचस्प बात यह है कि वायुसेना प्रमुख स्वयं 17वें उड़ान परीक्षण कोर्स के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्होंने सभी ग्रेजुएट अधिकारियों को प्रमाण पत्र सौंपे और शानदार प्रदर्शन करने वाले मेधावियों को पुरस्कार प्रदान किए। सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड स्टूडेंट टेस्ट पायलट के लिए 'सुरंजन दास ट्रॉफी' स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह ने अपने नाम की। उड़ान मूल्यांकन में सर्वश्रेष्ठ छात्र टेस्ट पायलट की 'चीफ ऑफ द एयर स्टाफ ट्रॉफी' स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को मिली। वहीं, सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड स्टूडेंट फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर के लिए 'महाराजा हनुमंत सिंह स्वॉर्ड' विंग कमांडर अभिनव कुमार को प्रदान की गई। उड़ान मूल्यांकन में सर्वश्रेष्ठ फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर की 'डनलप ट्रॉफी' विंग कमांडर प्रणव शर्मा ने और ग्राउंड विषयों में सर्वश्रेष्ठ छात्र की 'कपिल भार्गव ट्रॉफी' स्क्वाड्रन लीडर पारस शर्मा ने जीती।

Advertisement

स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकस

समारोह को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने इन नए 'आसमानी योद्धाओं' को पूरी एकाग्रता के साथ आगे भी कड़ी मेहनत जारी रखने का मंत्र दिया। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता निर्माण और आधुनिकीकरण की दिशा में यह सभी अधिकारी आगे चलकर एक गेम-चेंजर भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को विकसित करने के लिए आत्मनिर्भरता आज के समय की सबसे बड़ी रणनीतिक जरूरत है। राष्ट्र के स्वदेशीकरण अभियान को रफ्तार देने और एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए इन परीक्षण दलों को बड़ी जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने उपकरणों की सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए डिजाइन से डिलीवरी तक के समय-चक्र को घटाने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।

Advertisement

Advertisement
×