वीआरएस के बाद बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की चुनाव लड़ने की अटकलें, फिलहाल किया इनकार!

कहा- बिहार की अस्मिता और सुशांत को न्याय दिलाने के लिए लड़ी लड़ाई

वीआरएस के बाद बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की चुनाव लड़ने की अटकलें, फिलहाल किया इनकार!

पटना, 23 सितंबर (एजेंसी)

ऐच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) लेने के एक दिन बाद बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने बुधवार को कहा कि उन्होंने चुनाव लड़ने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में अपने सेवाकाल के दौरान अपनी मुखरता को उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं जोड़ कर देखे जाने के बारे में उन्होंने कहा, ‘कोई कुछ भी बोल सकता है। सुशांत मामले से मेरे वीआरएस का कुछ भी लेना-देना नहीं है।’ पांडेय ने दावा किया, ‘उस मामले में जो लडाई लड़ी, वह बिहार की अस्मिता और सुशांत को न्याय दिलाने के लिए किया।’ उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सेवा में तीन दशक से अधिक समय बिताया है और कोई भी मेरी पेशेवर अखंडता पर उंगली नहीं उठा सकता है। चुनाव लड़ने के बारे में अपनी योजना के बारे में पूछे जाने पर पांडेय ने कहा, ‘मैं चुनाव लड़ूंगा, यह भी मैंने अभी कहां कहा है। बक्सर, बेगूसराय, जहानाबाद और वाल्मीकि नगर संसदीय क्षेत्र सहित कई जिलों के शुभचिंतकों का दबाव है।’ केसरिया रंग का गमछा कंधे पर डाले गुप्तेश्वर से पूछे जाने पर कि उन्होंने ‘भगवा’ रंग धारण कर लिया है, इसका मतलब यह लगाया जाए कि वे भाजपा में शामिल होने वाले हैं, उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक ढंग से मत देखिए। उन्होंने कहा, ‘मैं अभी किसी राजनीतिक दल में न शामिल हुआ हूं और न ही राजनीतिक व्यक्ति हूं। जब मैं तय करुंगा कि राजनीति में जाना और कौन दल में शामिल जाना है वह भी मैं बताउंगा।’ पांडेय ने कहा, ‘मैं सेवा के नियमों से बंधा हुआ नहीं, अब एक स्वतंत्र व्यक्ति हूं। मैं, यदि मैं चाहता हूं, तो देश के किसी भी अन्य नागरिक की तरह चुनाव लड़ सकता हूं। मैं वर्तमान में सैकड़ों लोगों से मिलने के लिए उत्सुक हूं।’ ऐच्छिक सेवानिवृति ले चुके पूर्व पुलिस महानिदेशक ने कहा कि वह विभिन्न जिलों के अपने शुभचिंतकों से बात करेंगे। उनसे बात करके तय करुंगा कि मुझे क्या करना है। नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर पांडेय ने कहा कि वह प्रशासन एवं पुलिसिंग के मामले में बिल्कुल सख्त हैं। उनका विजन बहुत स्पष्ट है। पुलिसिंग के मामले में वह न किसी प्रकार का नाजायज राजनीतिक हस्तक्षेप करते हैं और न कोई सत्तारुढ़ दल का व्यक्ति करे, उसे बर्दाश्त करते हैं।

 

 

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