पंचायत के बाद लघु सचिवालय पहुंचे प्रदर्शनकारी, 15 दिन में गिरफ्तारी का आश्वासन; चेतावनी- कार्रवाई नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन
रोहित धनखड़ हत्याकांड : न्याय की मांग को लेकर एसपी कार्यालय तक निकाला मार्च
Rohit Dhankhar Murder Case : अंतरराष्ट्रीय बॉडीबिल्डर एवं छह बार के राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता स्व. रोहित धनखड़ हत्याकांड में शेष आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बुधवार को रोहित धनखड़ न्याय समिति के आह्वान पर मानसरोवर पार्क में पंचायत आयोजित की गई। पंचायत में बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, ग्रामीण और विभिन्न खापों के लोग शामिल हुए।
पंचायत के बाद प्रदर्शनकारी न्याय मार्च निकालते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर रवाना हुए। लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर पुलिस ने मार्च को रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए। इस दौरान रोहित धनखड़ की मां ने पुलिस अधीक्षक गौरव राजपुरोहित से मिलने की मांग करते हुए कहा कि वह बिना मिले यहां से वापस नहीं जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन हर बार केवल आश्वासन देकर उन्हें लौटा देता है, जबकि अब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए हैं।
बाद में पुलिस अधीक्षक गौरव राजपुरोहित स्वयं लघु सचिवालय के बाहर पहुंचे और रोहित की मां व प्रतिनिधिमंडल से सहृदयतापूर्वक बातचीत की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले में पूरी गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है। एसपी ने बताया कि मामले में शेष आरोपियों की पहचान हो चुकी है और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। उन्होंने 15 दिन के भीतर शेष आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।
पत्रकारों से बातचीत में एसपी ने कहा कि जो आरोपी फरार हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्हें भगोड़ा घोषित कराने की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जाएगी। एसपी के आश्वासन के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि वे 15 दिन तक प्रशासन को समय दे रहे हैं। यदि इस अवधि में सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा और सर्वखाप पंचायत बुलाकर आगामी रणनीति की घोषणा की जाएगी।
पंचायत ने स्पष्ट किया कि रोहित धनखड़ को न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि 27 नवंबर 2025 को भिवानी में अंतरराष्ट्रीय बॉडीबिल्डर रोहित धनखड़ की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मामले में सर्वखाप पंचायत की मांग पर जांच बाद में भिवानी से रोहतक स्थानांतरित कर दी गई, लेकिन आठ माह बाद भी शेष आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में लगातार आक्रोश बना हुआ है।

