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कालिंदी कुंज घाट पर यमुना में फिर जमी जहरीले झाग की मोटी परत, हालात बदतर

नदी किनारे पर बंधी नावों के चारों ओर झाग भारी मात्रा में एकत्र हो गया जो नावों से भी चिपका पाया गया

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कालिंदी कुंज स्थित घाट पर यमुना नदी में रविवार को जहरीले झाग की मोटी परत फिर से जम गई जिससे नदी के बड़े हिस्से में जल नहीं दिखाई दे रहा था। विशेषज्ञों ने दोहराया कि यह नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक है।

नदी किनारे पर बंधी नावों के चारों ओर झाग भारी मात्रा में एकत्र हो गया जो नावों से भी चिपका पाया गया। नदी किनारे जमे झाग में धूल के कण भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। झाग के अलावा नदी किनारे कचरा भी बिखरा हुआ था। कचरे में प्लास्टिक सामग्री, बोतलें, फूल, मानव के बाल और यहां तक ​​कि ब्लेड भी शामिल थे। हर रविवार को कालिंदी कुंज घाट पर स्वच्छता अभियान चलाने वाले पर्यावरणविद पंकज कुमार ने दावा किया कि दिसंबर और जनवरी में पानी पिछले साल अक्टूबर में छठ पर्व से पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रदूषित रहा।

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कुमार ने कहा कि छठ पर्व के दौरान यमुना नदी की सफाई के लिए सामूहिक रूप से जोरदार प्रयास किए गए थे। यदि सरकार ने इस गति को बनाए रखा होता, तो नदी की स्थिति कुछ ही महीनों में काफी सुधर जाती। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की यमुना के जल की गुणवत्ता पर नवीनतम रिपोर्ट तीन दिसंबर, 2025 को एकत्र किए गए नमूनों के आधार पर आधारित है। इस रिपोर्ट में आईटीओ ब्रिज पर जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर 25 मिलीग्राम प्रति लीटर, आईएसबीटी ब्रिज पर 24 मिलीग्राम प्रति लीटर और ओखला बैराज पर 17 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई है, जबकि डीपीसीसी द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा तीन मिलीग्राम प्रति लीटर है।

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बीओडी किसी नदी की सेहत और जलीय जीवन को बनाए रखने की उसकी क्षमता का एक महत्वपूर्ण सूचक है। दूसरी ओर दिसंबर की रिपोर्ट के अनुसार, आईएसबीटी ब्रिज पर मल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का स्तर (जिसे सर्वाधिक संभावित संख्या (एमपीएन) के रूप में मापा गया) 92,000, निजामुद्दीन ब्रिज पर 54,000 और आईटीओ ब्रिज पर 35,000 दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक मल कोलीफॉर्म (जो सीवेज संबंधी प्रदूषण का एक सूचक है) की वांछनीय सीमा 500 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर और अनुमेय सीमा 2,500 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर है।

सीपीसीबी 20-30 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच के बीओडी स्तर को ‘गंभीर' श्रेणी में रखता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने बृहस्पतिवार को पाया कि दिल्ली सरकार की तरल अपशिष्ट प्रबंधन रिपोर्ट में यमुना नदी, विशेष रूप से वजीराबाद बैराज और अशगरपुर गांव के बीच, में जल प्रदूषण का मुख्य कारण विभिन्न नालों के माध्यम से उपचारित, आंशिक रूप से उपचारित और अनुपचारित सीवेज का बहाव है।

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