आंखों में आंसू, गोद में सन्नाटा... जिस अस्पताल में इलाज के लिए आए थे, वहीं बुझ गई 3 मासूमों की जिंदगी; परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
तीन नन्ही जिंदगियां खत्म, अब जवाब मांग रहे माता-पिता
Amravati Hospital Fire : महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल में सोमवार तड़के हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जबकि धुएं और आग के बीच 36 अन्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद अस्पताल में चीख-पुकार मच गई और अपने मासूमों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन गोद हो गई सूनी
जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को बेहतर इलाज और सुरक्षित जिंदगी की उम्मीद में अस्पताल में भर्ती कराया था, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यही जगह उनके लिए सबसे बड़ा दर्द बन जाएगी। हादसे के बाद परिजन लगातार अस्पताल प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। उनका सवाल है कि NICU जैसे संवेदनशील हिस्से में आग से निपटने और नवजातों को तुरंत सुरक्षित निकालने के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे?
परिजनों का गुस्सा, उठ रहे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते आग पर काबू पाने और बच्चों को सुरक्षित निकालने की प्रभावी व्यवस्था होती, तो शायद तीन मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। अब परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस दर्दनाक घटना की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
जांच के बीच इंसाफ की उम्मीद
जिला प्रशासन और सरकार की ओर से मामले की जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है। जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले भी अस्पताल का दौरा करने वाले हैं। जांच कमेटी गठित किए जाने की संभावना है। हालांकि, जांच से ज्यादा पीड़ित परिवारों को उस सवाल का जवाब चाहिए, जिसका दर्द उनके साथ जिंदगीभर रहेगा- उनके मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन है?

