46 साल पुराना किरायेदारी का रिश्ता, न केस न कैश... बस चाबी लौटाकर चले गए मास्टर गिरधारी लाल
1980 में किराए पर ली थी दुकान, चार दशक से अधिक समय तक यहीं चलाया सिलाई का काम, मकान मालिक के परिवार से पीढ़ियों पुराना रिश्ता, जरूरत पड़ी तो मौखिक सूचना पर दुकान भी खाली की
किरायेदारी के विवाद जहां अक्सर अदालतों और मुआवजे की मांग तक पहुंच जाते हैं, वहीं हिसार की जैन गली में 46 साल पुराना एक किरायेदारी का रिश्ता बिना किसी विवाद के खत्म हुआ। वर्ष 1980 में स्वर्गीय प्रकाश जैन की बिल्डिंग में दुकान किराए पर लेकर सिलाई का काम शुरू करने वाले मास्टर गिरधारी लाल ने शनिवार को दुकान की चाबी मकान मालिक के पौत्र एडवोकेट राजेश जैन को सौंप दी। खास बात यह रही कि दुकान खाली करने के बदले उन्होंने न किसी मुआवजे की मांग की और न ही कोई विवाद खड़ा किया। पड़ोसी दुकानदारों की मौजूदगी में हुई यह चाबी वापसी सिर्फ एक दुकान खाली करने की घटना नहीं रही, बल्कि वर्षों से कायम विश्वास और आपसी रिश्ते की मिसाल बन गई।
1980 में शुरू हुआ था रिश्ता
मास्टर गिरधारी लाल ने वर्ष 1980 में जैन गली स्थित दुकान किराए पर ली थी। यहां उन्होंने एसके टेलर्स के नाम से सिलाई का काम शुरू किया। चार दशक से अधिक समय तक यही दुकान उनके कारोबार और परिवार की रोजी-रोटी का आधार बनी रही। इसी दौरान मकान मालिक का परिवार भी उन्हें सिर्फ किरायेदार के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिचित और करीबी व्यक्ति के तौर पर देखता रहा। समय के साथ परिवार और कारोबार की परिस्थितियां बदलीं, लेकिन दोनों परिवारों के बीच संबंध बने रहे।
जरूरत पड़ी तो पहले भी खाली कर दी थी दुकान
इस रिश्ते की खास बात यह रही कि जब बीच में मकान मालिक को दुकान की जरूरत पड़ी, तब मास्टर गिरधारी लाल ने मौखिक सूचना पर दुकान खाली कर दी थी। बाद में मकान मालिक ने दुकान किसी दूसरे व्यक्ति को देने के बजाय जरूरत खत्म होने पर फिर से उन्हें किराए पर दे दिया। इस तरह दुकान का किरायेदारी संबंध केवल कारोबारी लेन-देन तक सीमित नहीं रहा। करीब 46 वर्षों में दोनों परिवारों के बीच भरोसा लगातार बना रहा।
अब बेटे ने संभाला कारोबार
वर्तमान में मास्टर गिरधारी लाल के पुत्र राकेश कुमार एसके टेलर्स का काम संभाल रहे हैं। परिवार ने इसी गली में दूसरी दुकान किराए पर ले ली है। ऐसे में पुरानी दुकान को खाली करने की जरूरत पड़ी। रविवार को मास्टर गिरधारी लाल ने पड़ोसी दुकानदारों की मौजूदगी में दुकान की चाबी एडवोकेट राजेश जैन को सौंप दी। खास बात यह रही कि दुकान खाली करने के एवज में उन्होंने किसी तरह के मुआवजे या अन्य भुगतान की मांग नहीं की।
बोले- मास्टर जी के सामने ही बड़ा हुआ
एडवोकेट राजेश जैन ने कहा कि मास्टर गिरधारी लाल के साथ उनके परिवार का रिश्ता कई दशकों पुराना है। उन्होंने कहा, ‘मैं मास्टर जी के सामने ही बड़ा हुआ और फिर वकालत के पेशे में आया। लोगों को दुकान खाली कराने के लिए वर्षों अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन मास्टर जी ने बिना किसी विवाद के दुकान खाली कर दी और एक पैसा भी नहीं लिया।’ राजेश जैन के मुताबिक आज के दौर में संपत्ति और किरायेदारी को लेकर छोटे-छोटे विवाद भी लंबे कानूनी मामलों में बदल जाते हैं। ऐसे समय में मास्टर गिरधारी लाल का यह कदम उनके परिवार के लिए केवल दुकान खाली करने की घटना नहीं, बल्कि वर्षों के विश्वास की मिसाल है।
चाबी दुकान की लौटी, भरोसा और मजबूत हुआ
46 साल बाद दुकान की चाबी भले ही मकान मालिक के परिवार को वापस मिल गई, लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी वहीं रह गई - भरोसा। एक किरायेदार और मकान मालिक के बीच शुरू हुआ संबंध चार दशक से अधिक समय बाद भी विवाद या मुआवजे की मांग के बजाय आपसी सम्मान के साथ खत्म हुआ। मास्टर गिरधारी लाल ने दुकान छोड़ी है, लेकिन इस रिश्ते में अपने हिस्से की ईमानदारी और विश्वास की ऐसी छाप छोड़ गए हैं, जिसे किसी किरायेदारी समझौते या कानूनी दस्तावेज से नहीं मापा जा सकता।

