2026 Asian Games : एशियाई खेलों से पहले बढ़ा तनाव, विनेश और WFI आमने-सामने... कानूनी विकल्प और सपना
नियमों से जुड़ा पात्रता का तकनीकी मुद्दा नहीं मान रहा बल्कि इसे अनुशासनात्मक मामला मान रहा है
विनेश फोगाट और भारतीय कुश्ती महासंघ के बीच नया टकराव अब एक आम पात्रता विवाद से आगे बढ़ गया है। यह कुछ ऐसा है जो उनके भविष्य और 2026 एशियाई खेलों से पहले भारतीय कुश्ती में सत्ता की पकड़ दोनों को तय कर सकता है। डब्ल्यूएफआई इस मामले को सिर्फ संन्यास और प्रतियोगिता में वापसी के नियमों से जुड़ा पात्रता का तकनीकी मुद्दा नहीं मान रहा बल्कि इसे अनुशासनात्मक मामला मान रहा है। यह अंतर बहुत जरूरी है क्योंकि इससे यह तय होता है कि विनेश के पास अब क्या विकल्प हैं।
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि महासंघ ने फिलहाल उनकी वापसी के दरवाजे बंद कर दिए हैं। फिर भी महासंघ के सख्त रुख के बावजूद अगर पहलवान ऐसा करना चाहती हैं तो उनके लिए एक रास्ता है। इस टकराव के केंद्र में डब्ल्यूएफआई का यह आरोप है कि विनेश ने 2023 में ट्रायल प्रक्रिया के दौरान महासंघ के नियमों का उल्लंघन किया था जब महासंघ को निलंबित कर दिया गया था और आईओए द्वारा नियुक्त तदर्थ समिति उसका कामकाज देख रही थी। विनेश से पहले ही जवाब मांगा जा चुका है और अगर उस समय के तदर्थ समिति के सदस्यों से भी फैसले लेने के बारे में बताने के लिए कहा जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी।
समिति की अगुआई भूपिंदर सिंह बाजवा कर रहे थे। हां, अगर विनेश को कुछ सफाई देनी है तो तदर्थ समिति के सदस्य भी डब्ल्यूएफआई और यूडब्ल्यूडब्ल्यू के नियमों की जरा भी परवाह नहीं करने के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं। जरूरत पड़ने पर उनसे भी जवाब मांगा जा सकता है। संजय सिंह ने बात करते हुए इशारा किया कि डब्ल्यूएफआई का मानना है कि विनेश की परेशानियां प्रशासनिक नहीं बल्कि खुद की वजह से हैं। उन्होंने विनेश पर लगे एक आरोप का जिक्र करते हुए पूछा कि आप खुद एक खिलाड़ी हैं। क्या आप एक ही दिन में दो वजन वर्ग में ट्रायल दे सकती हैं? जब वह मेरे से मिलीं तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
पहला और शायद सबसे आसान रास्ता है प्रक्रियागत अनुपालन। डब्ल्यूएफआई ने बार-बार कहा है कि दरवाजे हमेशा के लिए बंद नहीं हुए हैं। संजय सिंह ने खुद कहा कि महासंघ उनके लिखित स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है। अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक है तो उनकी वापसी स्वीकार्य होगी। अगर यह संतोषजनक नहीं है तो वह नहीं खेल पाएंगी। इसका मतलब है कि विनेश का निकट भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह अनुशासनात्मक प्रणाली से जुड़ती हैं या मामले को कानूनी और राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाती हैं।
एक संभावना यह है कि वह कारण बताओ नोटिस का विस्तृत जवाब दें और अनुशासनात्मक समिति के सामने प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी की मांग करें। अगर समिति इसे स्वीकृति दे देती है तो वह एशियाई खेले क्वालीफिकेशन सहित बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए दौड़ में बने रहने के लिए समय पर घरेलू प्रतियोगिताओं में वापसी कर सकती हैं। विनेश अगर एशियाई खेलों के लिए जापान जाती हैं तो वह पदक की मजबूत दावेदारों में शामिल रहेंगी।
हालांकि अगर डब्ल्यूएफआई उनकी सफाई खारिज कर देता है तो यह झगड़ा अदालत में जा सकता है। विनेश महासंघ के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय या खेल मंत्रालय के समक्ष चुनौती दे सकती है, या भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के जरिए दखल की मांग भी कर सकती हैं विशेषकर तब जब उनका कहना है कि डब्ल्यूएफआई का फैसला मनमाना है या चुनिंदा तरीके से लागू किया गया है।

