Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

YJKLS Dispute : फिल्म के नाम में बदलाव की मांग खारिज, SC ने ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर रोक से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट का फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' पर प्रतिबंध लगाने से इनकार

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

YJKLS Dispute : सुप्रीम कोर्ट ने आने वाली फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' पर बुधवार को प्रतिबंध लगाने या उसके नाम में बदलाव करने के अनुरोध वाली याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि यह नाम यादव समुदाय को किसी भी तरह से अपमानजनक तरीके से चित्रित नहीं करता है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने संगठन 'विश्व यादव परिषद' के प्रमुख द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।

पीठ ने रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री का अध्ययन किया और पाया कि मुख्य शिकायत यह थी कि फिल्म का नाम समाज में यादव समुदाय को गलत तरीके से दर्शाता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ''इसलिए, यह दलील दी जा रही है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए। हम यह समझने में असमर्थ हैं कि फिल्म का शीर्षक किस प्रकार समुदाय को अपमानजनक रूप में चित्रित कर सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई विशेषण या शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को गलत तरीके से दर्शाता हो।''

Advertisement

पीठ ने इन आशंकाओं को ''पूरी तरह निराधार'' करार दिया और 'घूसखोर पंडत' से संबंधित ऐसे ही मामले में अपने पूर्व के आदेश की व्याख्या की जिसमें न्यायालय ने निर्माता को उस फिल्म का शीर्षक बदलने का निर्देश दिया था। आदेश में कहा गया है, '''घूसखोर' शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है। इसलिए यह शीर्षक समुदाय को नकारात्मक अर्थ में दर्शा रहा था। वर्तमान मामले में यादव समुदाय के साथ ऐसा कोई नकारात्मक अर्थ नहीं जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 19(2) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध) के तहत कोई भी उचित प्रतिबंध लागू नहीं होता है। यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत या नकारात्मक रूप में चित्रित नहीं करता है। इसलिए रिट याचिका खारिज की जाती है।''

Advertisement

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि फिल्म का शीर्षक समुदाय के प्रति एक आपत्तिजनक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देता है। याचिका में महिला मुख्य किरदार के चित्रण पर चिंता व्यक्त की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वे अंतर-सामुदायिक विवाहों का विरोध नहीं करते लेकिन फिल्म में एक महिला का चित्रण अस्वीकार्य है। वकील ने कहा, ''एक महिला को इस तरह प्रचारित नहीं किया जा सकता।'' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित होने का दावा करती है। हालांकि, न्यायाधीश इस बात से सहमत नहीं हुए और फिल्म को काल्पनिक रचना करार दिया।

Advertisement
×