Pauranik Kathayen : कौन थी रंभा, जिनकी खूबसूरती पर रावण भी हो गए थे मोहित, ऋषि विश्वामित्र के श्राप ने बना दिया था पत्थर की मूर्त
इंद्र की सभा की सबसे प्रिय अप्सराओं में से एक रंभा थीं
भगवान इंद्र के स्वर्गीय दरबार में सजी अप्सराएं केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे भाव, सौंदर्य व मोहकता की जीवंत प्रतीक थीं। रंभा, उर्वशी, कृतस्थली, मेनका, पुंजिकस्थला, प्रम्लोचा, घृताची, अनुम्लोचा, वर्चा, तिलोत्तमा और पूर्वचित्ति को इंद्र के दरबार की खास अप्सराएं माना जाता था। ऐसा कहा जाता है कि इंद्र की सभा की सबसे प्रिय अप्सराओं में से एक रंभा थीं, जिनके बारे में आज हम आपको बताएंगे...
कौन थी रंभा?
रंभा अपनी सुंदरता और मोहक आकर्षण के कारण तीनों लोकों में प्रसिद्ध थीं। रंभा को ना सिर्फ रूप की देवी कहा गया बल्कि उन्हें आकर्षण और कला की पराकाष्ठा भी माना गया। उनकी एक झलक से देवताओं का मन मोहित हो जाता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से जन्मीं रंभा को मां लक्ष्मी का स्वरूप भी माना जाता है। वहीं, कुछ पौराणिक कथाएं में उन्हें ऋषि कश्यप और प्रधा की पुत्री बताया गया है।
रावण भी हो गया था मोहित
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रंभा का विवाह कुबेर के पुत्र नलकुवर से हुआ था। रामायण में रंभा का जिक्र नलकुबेर की पत्नी के रूप में मिलता है। रावण ने रंभा के साथ दुर्व्यवहार करने का प्रयास किया था, जिसके बाद नलकुवर ने रावण को श्राप दिया था कि अगर वह किसी भी स्त्री को उसकी इच्छा के विरुद्ध स्पर्श करेगा, तो उसी समय भस्म हो जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि इसी श्राप के कारण माता सीता का हरण करने के बाद भी रावण बिना उनकी मर्जी के उन्हें छूने से डरता था।
जब शिला बन गईं थी रंभा
एक कथा के अनुसार, जब ऋषि विश्वामित्र गहरी तपस्या कर रहे थे, तब भगवान इंद्र ने उनकी साधना भंग करने के लिए रंभा को भेजा था। हालांकि विश्वामित्र रंभा की योजना समझ गए और गुस्से में आकर रंभा को श्राप दे दिया कि वे हजार साल तक पत्थर बनी रहेंगी। बाद में कई कथाओं में बताया गया है कि किसी ऋषि की तपस्या और प्रयास से रंभा को इस श्राप से मुक्ति मिल गई।
अप्सरा रंभा के नाम पर रखा जाता है व्रत
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रंभा के नाम पर एक खास व्रत रखा जाता है, जिसे रंभा तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं अच्छे जीवनसाथी, सुख -समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।
डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।

