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Hybrid Work : घर में साथ रहकर भी क्यों बढ़ रहा तनाव? हाइब्रिड वर्क पर रिसर्च ने खोले कई राज

'हाइब्रिड वर्क' में काम और घर के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें? दंपति ऐसे तय करें स्पष्ट दायरे

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Hybrid Work : दफ्तर और घर दोनों जगह से काम करने की व्यवस्था (हाइब्रिड वर्क) ने कर्मचारियों को कई वास्तविक लाभ दिए हैं। अधिक लचीलापन होने से काम के साथ परिवार की जिम्मेदारियों, निजी प्रतिबद्धताओं और अन्य आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना पहले की तुलना में आसान हुआ है। हालांकि, इस व्यवस्था ने नयी चुनौतियां भी पैदा की हैं, खासकर उन पेशेवर दंपतियों के लिए जो अपने साझा पारिवारिक जीवन के साथ-साथ अपने-अपने करियर को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।

जब काम और पारिवारिक जीवन के बीच की सीमाएं लगातार धुंधली होने लगती हैं, तब दंपतियों के सामने यह तय करने जैसी मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं कि घर की जिम्मेदारियां कैसे बांटी जाएं और दोनों के करियर को समान रूप से कैसे आगे बढ़ाया जाए। मैं और मेरे सहयोगी इस विषय में इसलिए रुचि लेने लगे क्योंकि हमने अपने जीवन में 'हाइब्रिड वर्क' के दोनों पहलुओं को करीब से महसूस किया। इसका लचीलापन निश्चित रूप से उपयोगी था, लेकिन इससे काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना हमेशा आसान नहीं हो जाता।

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हम यह समझना चाहते थे कि आखिर किन कारणों से कुछ दंपति 'हाइब्रिड वर्क' व्यवस्था को अपने पक्ष में सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर पाते हैं। इसके लिए हमने ऐसे दंपतियों से बातचीत की, जिनमें दोनों साथी अपने साझा पारिवारिक जीवन के साथ-साथ सफल करियर बनाने की कोशिश कर रहे थे। हमारे शोध की खास बात यह रही कि हमने दोनों जीवनसाथियों का अलग-अलग साक्षात्कार लिया। इससे हमें केवल व्यक्तिगत अनुभव ही नहीं, बल्कि यह भी समझने का अवसर मिला कि वे एक टीम के रूप में दफ्तर और घर दोनों जगह से काम करने की व्यवस्था को कैसे संभालते हैं।

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हमारे अध्ययन में पाया गया कि 'हाइब्रिड वर्क' को सफल बनाने में केवल व्यक्तिगत आदतें ही महत्वपूर्ण नहीं होतीं, बल्कि यह भी उतना ही जरूरी है कि दंपति अपने काम और घरेलू जीवन का तालमेल किस तरह बैठाते हैं। हमने यह भी पाया कि सभी दंपतियों की 'हाइब्रिड वर्क' से अपेक्षाएं एक जैसी नहीं होतीं। यही कारण है कि वे अपने नियोक्ता से भी अलग-अलग तरह के लचीलेपन की उम्मीद रखते हैं।

सीमाएं तय करना जरूरी

सबसे पहले हमने पाया कि दंपतियों के लिए यह स्पष्ट करना बेहद जरूरी है कि काम कहां समाप्त होता है और निजी जीवन कहां से शुरू होता है। इसके लिए दफ्तर और घर दोनों जगह अपनी उपलब्धता को लेकर स्पष्ट अपेक्षाएं तय करना आवश्यक है। प्रौद्योगिकी इसमें मददगार साबित हो सकती है। कैलेंडर में समय पहले से निर्धारित करना, कार्यालय से बाहर होने का संदेश लगाना या ईमेल हस्ताक्षर में अपने कार्य समय का उल्लेख करना इसके प्रभावी तरीके हैं। घर में भी दफ्तर का बंद दरवाजा यही संदेश देता है कि उस समय व्यक्ति काम में व्यस्त है।

हमारे अध्ययन में शामिल लोगों का मानना था कि इन सीमाओं का पालन करना जरूरी है, ताकि सहकर्मी और परिवार के सदस्य स्पष्ट रूप से समझ सकें कि कौन कब उपलब्ध है। रोजाना दफ्तर आने-जाने की जरूरत न होना 'हाइब्रिड वर्क' का सबसे बड़ा लाभ माना जाता है। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। इसी सफर के दौरान लोगों को मानसिक रूप से काम से बाहर निकलने और निजी जीवन में लौटने का अवसर भी मिल जाता था, जो अब काफी हद तक समाप्त हो गया है। ऐसे में घर से काम करने वाले दिनों में कुछ छोटे-छोटे दैनिक नियम या आदतें अपनाना उपयोगी हो सकता है, जो यह संकेत दें कि अब कार्यदिवस समाप्त हो गया है। अगर यह बदलाव स्पष्ट न हो, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ सकता है, क्योंकि व्यक्ति मानसिक रूप से काम से बाहर निकल ही नहीं पाता और परिवार के साथ पूरी तरह मौजूद नहीं रह पाता।

दंपतियों के बीच बेहतर तालमेल भी उतना ही जरूरी हमारे अध्ययन में यह भी सामने आया कि यदि दंपति सप्ताह की योजना पहले से मिलकर बनाएं, तो दफ्तर और घर दोनों जगह से काम करने की व्यवस्था कहीं अधिक सहज हो सकती है। यह योजना केवल कार्यालय के कामों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें यह भी तय होना चाहिए कि बच्चों को स्कूल कौन छोड़ेगा और लेकर आएगा, खाना कौन बनाएगा तथा परिवार की अन्य जिम्मेदारियां कौन निभाएगा। जब दोनों साथी घर से काम कर रहे हों, तो अक्सर यह मान लिया जाता है कि दोनों समान रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन वास्तव में यह तय करना कि कौन क्या करेगा, आपसी बातचीत और समझौते से ही संभव होता है।

कई दंपतियों ने यह भी बताया कि काम समाप्त होने पर कुछ मिनट साथ बैठकर पूरे दिन की चर्चा करना बेहद उपयोगी होता है। जिस तरह निजी आदतें काम से बाहर निकलने में मदद करती हैं, उसी तरह दिनभर के अच्छे-बुरे अनुभव, तनाव और चुनौतियां एक-दूसरे से साझा करने से दोनों साथी काम के माहौल से निकलकर पारिवारिक जीवन में सहजता से लौट पाते हैं। यह विशेष रूप से तब अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जब एक साथी मानसिक रूप से सहज हो चुका हो, जबकि दूसरा अब भी दिनभर के तनाव और निराशा से जूझ रहा हो। ऐसी बातचीत काम का दबाव वैवाहिक रिश्ते तक पहुंचने से रोकती है।

हमने यह भी पाया कि कुछ छोटे फैसलों के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, घर में अलग कार्यकक्ष किसे मिलेगा और रसोई की मेज पर काम किसे करना पड़ेगा। उस समय ये निर्णय व्यावहारिक लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय में उनका असर अलग हो सकता है। जिसे शांत माहौल में काम करने की सुविधा मिलती है, उसके लिए बेहतर प्रदर्शन करना आसान होता है, जबकि दूसरा व्यक्ति लगातार व्यवधानों और शोर-शराबे के बीच काम करता रहता है।

हर दंपति की जरूरत अलग-अलग

अगर कोई दंपति लंबे समय तक दोनों के करियर को साथ लेकर चलने के लिए दफ्तर और घर दोनों जगह से काम करने की व्यवस्था अपना रहा है, तो कार्यदिवस के दौरान मिलने वाला लचीलापन बेहद मूल्यवान साबित हो सकता है। इससे बच्चों को स्कूल से लाने-ले जाने, डॉक्टर के पास जाने जैसी जिम्मेदारियों का समन्वय आसान हो जाता है और किसी एक साथी के काम को हमेशा प्राथमिकता नहीं देनी पड़ती। नियोक्ताओं के दृष्टिकोण से देखें तो केवल लचीली कार्य व्यवस्था उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनसे कब उपलब्ध रहने की अपेक्षा है।

साथ ही उन्हें अपनी परिस्थितियों के अनुरूप काम करने की स्वतंत्रता और ऐसा कार्यस्थल मिलना चाहिए, जहां दिन समाप्त होने के बाद काम से अलग हो पाना भी प्रोत्साहित किया जाए। नियोक्ताओं को यह भी समझना होगा कि अलग-अलग कर्मचारी हाइब्रिड वर्क का उपयोग अलग-अलग कारणों से करते हैं। इसलिए वे अलग तरह के लचीलेपन और सहयोग को महत्व दे सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दफ्तर और घर दोनों जगह से काम करने की व्यवस्था सभी के लिए एक जैसा समाधान नहीं है, बल्कि इसकी सफलता व्यक्ति और उसकी परिस्थितियों के अनुसार बदलती है।

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