अरे... दूल्हा-दुल्हन को अच्छी रह हल्दी लगाओ... शादी से पहले क्यों निभाई जाती है यह परंपरा?
शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन को क्यों लगाई जाती है हल्दी?
Haldi Rasam : भारतीय शादियों में हल्दी की रस्म सिर्फ हंसी-मजाक और पीले रंग की खूबसूरत सजावट तक ही सीमित नहीं है। दादी-नानी के समय में इस रस्म को शादी से पहले की एक खास और शुभ परंपरा माना जाता था। आज भले ही यह रस्म एक मॉडर्न सेलिब्रेशन बन गई हो, लेकिन इसके पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं भी जुड़ी हुई है। वहीं, हल्दी लगाते समय घर की बुजुर्ग महिलाएं वर-वधू को कई बातें समझाती थीं, जिनमें नए जीवन, परिवार और रिश्तों को लेकर सीख भी शामिल होती थी।
हल्दी को माना जाता था शुभ
पुरानी मान्यताओं में हल्दी को शुद्धता, शुभता और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है। दादी-नानी मानती थीं कि शादी से पहले हल्दी लगाने से वर-वधू के जीवन में शुभ ऊर्जा आती है। पीले रंग को भी खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
बृहस्पति देव से जुड़ा है पीला रंग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पीले रंग का संबंध बृहस्पति यानी गुरु ग्रह से माना जाता है। गुरु को विवाह, ज्ञान, समृद्धि और सुखी दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है। यही वजह है कि शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने की परंपरा को गुरु की शुभ ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
विष्णु-लक्ष्मी के आशीर्वाद की मान्यता
पीला रंग भगवान विष्णु से भी जुड़ा माना जाता है। उन्हें पीतांबरधारी कहा जाता है और हिंदू परंपरा में विवाह जैसे शुभ कार्यों में भगवान विष्णु की विशेष भूमिका मानी जाती है। मान्यता है कि हल्दी की रस्म वर-वधू के जीवन में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा और समृद्धि का प्रतीक है।
बुरी नजर से बचाने की भी मान्यता
लोक मान्यताओं में हल्दी को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचाव से भी जोड़ा जाता है। दूल्हा-दुल्हन को पीले कपड़े पहनाना और हल्दी लगाना इसी विश्वास का हिस्सा माना जाता है।
नए जीवन के लिए देती थीं सीख
हल्दी की रस्म के दौरान बुजुर्ग महिलाएं नवविवाहित जोड़े को रिश्तों की अहमियत समझाती थीं। वे कहती थीं कि शादी सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं, बल्कि दो परिवारों को जोड़ने वाला रिश्ता है। प्यार, धैर्य, सम्मान और एक-दूसरे की भावनाओं को समझना सुखी दांपत्य जीवन की नींव माना जाता था।
डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।

