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Health Advice : गर्मा-गर्म चाय–कॉफी के साथ कहीं आप भी तो नहीं पी रहे प्लास्टिक? शोध में चौंकाने वाला खुलासा

प्लास्टिक या प्लास्टिक-लाइनिंग वाले कॉफी कप से निकल सकते हैं माइक्रोप्लास्टिक के हजारों कण : अध्ययन

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Health Advice : एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि प्लास्टिक या प्लास्टिक-लाइनिंग वाले कॉफी कप के गर्म पेय के संपर्क में आने पर बड़ी संख्या में माइक्रोप्लास्टिक कण निकल सकते हैं, जो सीधे पेय में मिल जाते हैं। ‘जर्नल ऑफ हजार्ड्स मेटेरियल्स: प्लास्टिक्स' में प्रकाशित शोध के अनुसार, तापमान माइक्रोप्लास्टिक के उत्सर्जन का सबसे अहम कारण है और कप की सामग्री इसमें निर्णायक भूमिका निभाती है। जैसे-जैसे पेय का तापमान बढ़ता है, प्लास्टिक से सूक्ष्म कणों के निकलने की दर भी बढ़ जाती है।

अध्ययन में बताया गया है कि ऑस्ट्रेलिया में हर साल लगभग 1.45 अरब सिंगल-यूज हॉट बेवरेज कप इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह संख्या करीब 500 अरब प्रतिवर्ष है। यह संख्या अधिक भी हो सकती है। इतने बड़े पैमाने पर उपयोग के कारण संभावित स्वास्थ्य जोखिम भी व्यापक हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पहले 30 अध्ययनों का विश्लेषण किया, जिनमें पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे सामान्य प्लास्टिक के व्यवहार को परखा गया। इसमें पाया गया कि गर्म तरल के संपर्क में माइक्रोप्लास्टिक का उत्सर्जन कुछ सौ कणों से लेकर लाखों कण प्रति लीटर तक हो सकता है।

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वहीं, पेय को कप में कितनी देर तक रखा गया, यह उतना महत्वपूर्ण कारक नहीं पाया गया जितना उसका तापमान महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद शोधकर्ताओं ने ब्रिस्बेन क्षेत्र से दो तरह के 400 कॉफी कप एकत्र कर उनका परीक्षण किया। इनमें पूरी तरह प्लास्टिक से बने कप और अंदर से पतली प्लास्टिक परत वाले कागजी कप शामिल थे। इन्हें ठंडे (5 डिग्री सेल्सियस) और गर्म (60 डिग्री सेल्सियस) पेय के साथ परखा गया। परिणामों के अनुसार, दोनों तरह के कप माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं, लेकिन पूरी तरह प्लास्टिक से बने कपों से, कागजी कपों की तुलना में अधिक कण निकलते हैं।

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गर्म पेय के मामले में माइक्रोप्लास्टिक का उत्सर्जन ठंडे पेय की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक पाया गया। अध्ययन में अनुमान जताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति रोजाना पॉलीएथिलीन के कप में 300 मिलीलीटर गर्म कॉफी पीता है, तो वह एक वर्ष में करीब 3.63 लाख माइक्रोप्लास्टिक कण निगल सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्लास्टिक के कप की अंदरूनी सतह खुरदरी होती है, जिससे कण आसानी से टूटकर अलग हो जाते हैं। गर्मी के कारण प्लास्टिक नरम पड़ता है और उसके कणों के फैलने-सिकुड़ने की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे माइक्रोप्लास्टिक का उत्सर्जन बढ़ जाता है।

हालांकि, अध्ययन में यह भी कहा गया है कि उपभोक्ताओं को अपनी कॉफी की आदत पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। जोखिम कम करने के लिए स्टेनलेस स्टील, सिरेमिक या कांच के पुन: उपयोग योग्य कप बेहतर विकल्प हैं। यदि डिस्पोजेबल कप का उपयोग जरूरी हो, तो प्लास्टिक-लाइनिंग वाले कागजी कप अपेक्षाकृत कम माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि अत्यधिक गर्म या उबलते तरल को सीधे प्लास्टिक या प्लास्टिक-लाइनिंग वाले कप में डालने से बचना चाहिए, क्योंकि तापमान थोड़ा कम होने से माइक्रोप्लास्टिक के उत्सर्जन को घटाया जा सकता है।

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