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विरासत पर कुठाराघात

सोलह जनवरी का ‘कॉलेज का कलेजा’ संपादकीय ‘दयाल सिंह कॉलेज’ की गौरवशाली विरासत से उनके नाम की अनुचित बेदखली पर सटीक प्रहार है। एक सदी पूर्व महान विभूति दयाल सिंह द्वारा रोपित शैक्षणिक और नैतिक संस्थाएं आज विश्वभर में प्रतिष्ठित हैं। उन पर ऐसा कुठाराघात जन भावनाओं के विरुद्ध है। जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय जनहित में ‘स्वत: संज्ञान’ लेता है, उसी तरह भारत सरकार को भी इस ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण हेतु तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

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एमएल शर्मा, कुरुक्षेत्र

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वैश्विक स्थिरता को खतरा

राष्ट्रपति ट्रंप का ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व का तर्क, रूस-चीन की बढ़ती मौजूदगी के संदर्भ में, अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन है। यह सोच शक्ति के बल पर सीमाएं बदलने की मानसिकता को दर्शाती है, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नकारा गया था। आर्कटिक की बढ़ती चुनौतियों का समाधान सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था से हो सकता है, न कि बलपूर्वक कब्जे से। इससे वैश्विक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

विभूति बुपक्या, दिल्ली

वृद्धावस्था का संबल

भारत डोगरा के लेख ‘बेहतर विमर्श से जीवन संतोषजनक बनाएं’ में वृद्ध जनों की स्वास्थ्य समस्याओं और जीवन को सुखमय बनाने पर विचार किया गया है। 2021-2030 को ‘स्वस्थ वृद्धावस्था दशक’ के रूप में मनाया जा रहा है। यदि वृद्धजन खानपान, व्यायाम, मानसिक सक्रियता और सामाजिक सम्मान का ध्यान रखें, तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। दक्षिण राजस्थान में ‘प्रबल यात्रा’ कार्यक्रम में 100 गांवों के वृद्धजन मिलकर समस्याओं पर चर्चा करना सुखद है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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