पारदर्शिता सुनिश्चित हो
उन्नीस सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘दर्द देता इलाज’ निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों से की जा रही मनमानी वसूली को उजागर करता है। संपादकीय में बताया गया है कि 11 रुपये में खरीदे गए आईवी इन्फ्यूजन सेट की एमआरपी 325 रुपये, 6.70 की सिरिंज की 57 रुपये और 29 में खरीदे गए कैथेटर की एमआरपी 310 रुपये थी। दवाइयों की कीमतों में भी भारी अंतर पाया गया। सरकार को निजी अस्पतालों में शुल्क की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं में भी सुधार करना चाहिए।
शामलाल कौशल, रोहतक
सिसकती इंसानियत
इक्कीस सितंबर के लेख ‘टूटती मर्यादाओं और नैतिक प्रभाव से सिसकती इंसानियत’ में रिश्तों की गिरती गरिमा के बारे में किया गया उल्लेख बहुत ही हृदयस्पर्शी था। मानवता को दरकिनार कर वर्तमान में रिश्ते संवेदनहीन, कठोर, व स्वार्थी हो गए हैं। संकीर्ण मानसिकता और गुस्सैल स्वभाव ने रिश्तों का खून कर दिया है। बेहतर समाज निर्माण के लिए मानवीय व नैतिक मूल्यों की शिक्षा व आचरण आवश्यक है। परस्पर सम्मान, संवाद, सहनशीलता और करुणा ही रिश्तों में विश्वास, अपनापन और मधुरता बनाए रख सकते हैं।
अभिलाषा गुप्ता, मोहाली
मर्यादा का विचार हो
इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने व्यवस्था पर सवाल उठाए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक व्यंग्य और व्यक्तिगत टिप्पणियों की मर्यादा पर भी विचार होना चाहिए। विपक्ष के नेता देश के सम्मानित पद पर होते हैं। आरोप-प्रत्यारोप प्रामाणिक और विचारणीय हों, ताकि सत्ता व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करे और छात्रों की समस्याएं भी सुनी जाएं।
शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर

