बेहतर संबंधों की अनिवार्यता
चौबीस अगस्त के विचार पृष्ठ पर ज्योति मल्होत्रा का लेख ‘बांग्लादेश से बेहतर संबंधों की अनिवार्यता’ दक्षिण-एशियाई शक्ति संतुलन के व्यापक संदर्भ में एक सार्थक कोशिश है। लेख के अनुसार, शेख हसीना से जुड़े विवाद को दोनों देशों के दीर्घकालीन संबंधों पर हावी नहीं होने देना चाहिए। चीन-पाकिस्तान के प्रभाव और पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा के मद्देनजर बांग्लादेश से दूरी राजनीतिक भूल होगी। 1971 के मुक्ति संग्राम के ऐतिहासिक संबंध इसका महत्वपूर्ण आधार हैं।
जयभगवान भारद्वाज, नाहड़
जनभागीदारी का आंदोलन
चौबीस अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में ‘वर्षा जल कुप्रबंधन’ संपादकीय भविष्य की चिंता पर गंभीर चिंतन लगा। मॉनसून की अनिश्चितता ने स्पष्ट कर दिया है कि जल संकट बारिश की कमी नहीं, बल्कि कुप्रबंधन का परिणाम है। भूजल का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। अतः शहरों में वर्षा जल संचयन अनिवार्य करने, जलाशयों को पुनर्जीवित करने और खेती में सूक्ष्म सिंचाई अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। जल संरक्षण को सरकारी अभियान की जगह जनभागीदारी का स्थायी संस्कार बनाना होगा।
अमृतलाल मारू, इंदौर, म.प्र.
बच्चों का भविष्य
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की भारी कमी है। गांव ढाणी के कई स्कूलों में स्वच्छ, शौचालय की सुविधा, जर्जर भवनों और सुरक्षा के अभाव में बच्चों का भविष्य अधर में है। शिक्षा के अधिकार को कागजी दावों से बाहर निकालकर विद्यालयों में बिजली, पानी, फर्नीचर और पक्के कमरों की तुरंत व्यवस्था की जानी चाहिए। सीएसआर फंड और भामाशाहों के सहयोग से ग्रामीण शिक्षा का कायापलट संभव है।
महेश कुमार, सिद्धमुख, राजस्थान

