विरोध सकारात्मक हो
लोकतंत्र में विरोध विपक्ष का अधिकार है, लेकिन न्यायपालिका के स्पष्टीकरण के बाद मतदाता सूची पुनरीक्षण को राजनीतिक मुद्दा बनाना अनुचित है। बिना ठोस तथ्यों के चुनाव आयोग पर सवाल उठाना विपक्ष की रणनीतिक कमजोरी दर्शाता है। आज का जागरूक मतदाता केवल आरोपों से नहीं, बल्कि रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर समाधान चाहता है। चुनाव जीतने के लिए विपक्ष को विरोध के बजाय सकारात्मक विकल्प पेश करना चाहिए।
विभूति बुपक्या, दिल्ली वि.वि., दिल्ली
इथेनॉल मिश्रण को चुनौती
‘इथेनॉल का मोल’ संपादकीय सटीक है। भारत तेल आयात पर निर्भर है, ऐसे में इथेनॉल मिश्रण एक संभावना है। वर्तमान गाड़ियां केवल 20 प्रतिशत इथेनॉल के अनुकूल हैं। 85 फीसदी इथेनॉल सस्ता होने के बावजूद, सामान्य इंजनों में जंग और खराबी पैदा करने वाली स्थिति ला देगा। अतः देश में ई-85 ईंधन के अनुकूल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का निर्माण अनिवार्य करना होगा, तभी यह विकल्प सफल होगा।
बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन
जवाबदेही तय हो
‘मौत के बोरवेल’ संपादकीय आंखें खोलने वाला है। हरियाणा के निर्भय की मौत हादसा नहीं, घोर लापरवाही है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी खुले बोरवेलों का होना प्रशासन की विफलता है। केवल बचाव अभियान काफी नहीं, बल्कि हादसों को रोकना ज़रूरी है। इसके लिए दोषी मालिकों पर कड़ा दंड और राजस्व विभाग के पटवारियों की निगरानी संबंधी जवाबदेही तुरंत तय की जानी चाहिए।
अमृतलाल मारू, इंदौर, म.प्र.
लापरवाही पर प्रहार
चार जुलाई के ‘दैनिक ट्रिब्यून’ में विश्वनाथ सचदेव का लेख नीट पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखा प्रहार करता है। जंतर-मंतर पर युवाओं का प्रदर्शन व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश है। पेपर लीक के कारण कई छात्रों की आत्महत्या के बाद शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए, जैसा कभी लाल बहादुर शास्त्री ने किया था। पाठ्यक्रम में बदलाव कर नाकामी छिपाने के बजाय सरकार को फुल-प्रूफ परीक्षा प्रणाली बनानी चाहिए।
शामलाल कौशल, रोहतक
