जन संसद की राय है कि प्रशासनिक लापरवाही और संसाधनों का अभाव ही सुरक्षा तंत्र की विफलता और दुखद मौतों का मुख्य कारण है।
नाकाम सुरक्षा तंत्र
नोएडा में एक युवा इंजीनियर की उसके पिता के सामने हुई दर्दनाक मौत हमारी आपदा-प्रबंधन व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है। कोहरे में दृश्यता कम होना कोई असामान्य स्थिति नहीं है, फिर भी मौके पर न प्रशिक्षित बचावकर्मी थे और न आवश्यक उपकरण। पिता की आंखों के सामने बेटा मदद की गुहार लगाता रहा और व्यवस्था मूक दर्शक बनी रही। हर दुर्घटना के बाद जांच बैठाना आसान है, परंतु पहले से प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना कठिन माना जाता है। अधूरी तैयारी दरअसल सुरक्षा नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का भी प्रतीक है।
अमृतलाल मारू, इंदौर
सिस्टम कमजोर
कोहरे में एक नवयुवक का कार समेत गहरे गड्ढे में गिर जाना और समय रहते न बचाया जाना सिस्टम की घोर विफलता है। पुलिस, एसडीआरएफ समय पर पहुंचीं, लेकिन उनके पास जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं थे। प्रशासन ने पहले बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नहीं लगाए, शिकायतों के बावजूद लापरवाही बरती गई। बाद में जिम्मेदारी तय करने के बजाय छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामला खत्म कर दिया जाएगा। यदि समय रहते उचित प्रबंध होते तो युवक की जान बच सकती थी। यह घटना सिस्टम द्वारा की गई हत्या के समान है।
पूनम कश्यप, नई दिल्ली
प्रशासनिक लापरवाही
नोएडा में हुई युवक की मौत प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है। यदि धुंध के समय खुले नालों को ढका जाता और स्ट्रीट लाइट की पर्याप्त व्यवस्था होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। पुलिस का संसाधनों और बचाव ट्रेनिंग के अभाव में मूकदर्शक बने रहना और भी शर्मनाक है। अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें इस त्रासदी से सबक लें। पुलिस बल को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रखकर, सेना की तर्ज पर आपदा प्रबंधन और जीवन रक्षा की आधुनिक ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। जनता की सुरक्षा केवल कागजों पर नहीं, धरातल पर दिखनी चाहिए।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर
सक्षम होना जरूरी
नोएडा की घटना कोई पहली नहीं है, इससे पहले भी आग, बोरवेल और कुओं में फंसे लोगों को साधनों के अभाव में बचाया नहीं जा सका। कहीं फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंची, कहीं पानी या रस्सी छोटी पड़ गई, तो कहीं उपकरण होते हुए भी उन्हें चलाना नहीं आता था। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। बचाव दलों के लिए नियमित व अनिवार्य प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल आवश्यक हैं ताकि वे आपात स्थिति में कुशलतापूर्वक कार्य कर सकें। केवल मौजूद रहना पर्याप्त नहीं, सक्षम भी होना जरूरी है।
भगवानदास छारिया, इंदौर
उपकरणों का अभाव
घने कोहरे में घर लौटते समय इंजीनियर युवराज मेहता की कार निर्माणाधीन इमारत के पानी भरे बेसमेंट में गिर गई। वे करीब दो घंटे तक फंसे रहे और मदद की गुहार लगाते रहे। पुलिस, फायर ब्रिगेड सहित सभी एजेंसियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन उनके पास न पर्याप्त उपकरण थे, न प्रशिक्षित कर्मी। ठंडे पानी और खराब दृश्यता के कारण कोई साहसिक बचाव नहीं हो सका और युवक की जान चली गई। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए आधुनिक उपकरण, विशेष प्रशिक्षण और निर्माण स्थलों पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है।
वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली
पुरस्कृत पत्र
लापरवाही की शृंखला
नोएडा में इंजीनियर की मौत को केवल दुर्घटना कहना सच्चाई से मुंह मोड़ना है। बिल्डर ने बिना सुरक्षा घेराबंदी के गहरा पानी भरा गड्ढा छोड़ा, ट्रैफिक पुलिस ने बैरिकेड या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए और बचाव दल अपर्याप्त उपकरणों के साथ पहुंचा। इन सभी की सामूहिक लापरवाही ने एक युवा का जीवन छीन लिया। यह घटना समाज और सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को दर्शाती है। भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचने के लिए बचाव दलों को आधुनिक संसाधनों से लैस करना और जिम्मेदारी बोध को पुनर्जीवित करना अत्यंत आवश्यक है। दोषियों की जवाबदेही तय कर कठोर दंड भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ईश्वर चंद गर्ग, कैथल

