पेस्टीसाइड फैक्टरी बंद करने की मांग, ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
गांव जोहड़माजरा और मनोहरपुर के बीच संचालित एक पेस्टीसाइड फैक्टरी के प्रदूषण से निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। फैक्टरी के खिलाफ लामबंद होकर दोनों गांवों के दर्जनों ग्रामीण मंगलवार को एसडीएम डॉ. रमन गुप्ता से मिले और फैक्टरी...
गांव जोहड़माजरा और मनोहरपुर के बीच संचालित एक पेस्टीसाइड फैक्टरी के प्रदूषण से निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। फैक्टरी के खिलाफ लामबंद होकर दोनों गांवों के दर्जनों ग्रामीण मंगलवार को एसडीएम डॉ. रमन गुप्ता से मिले और फैक्टरी को स्थाई रूप से बंद करवाने की मांग को लेकर एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंपा।
एसडीएम कार्यालय के बाहर रोष जताते हुए सरपंच दीपक पाल, जितेंद्र सिंह पंच, ग्रामीण मंदीप सिंह, हरजिन्द्र सिंह, जसविन्द्र सिंह, बलजीत सिंह, मुकेश, प्रदीप कुमार, रजत ने आरोप लगाया कि यह फैक्टरी नियमों को ताक पर रखकर अपने कैमिकल युक्त दूषित पानी को बोरवेल के जरिए धरती की निचली तहों में डाल रही है, जिससे आस-पास के समूचे क्षेत्र का पानी पूरी तरह जहरीला हो चुका है। मामले में एसडीएम डॉ. रमन गुप्ता ने बताया कि जोहड़माजरा व मनोहरपुर गांव के निवासियों ने ‘अरावली क्रॉप साइंस लिमिटेड पेस्टीसाइड फैक्ट्री’ के खिलाफ भूजल प्रदूषित करने की लिखित शिकायत दी है। ग्रामीणों द्वारा उठाए गए बिंदुओं और प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की जा रही है। यह संयुक्त टीम जल्द ही उक्त पेस्टीसाइड फैक्टी का निरीक्षण करेगी और वहां से पानी व कैमिकल के सैंपल लिए जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पानी का टीडीएस पहुंचा 750, पीने योग्य नहीं रहा भूजल
प्रदर्शनकारी ग्रामीण मंदीप सिंह ने वैज्ञानिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि फैक्टी से निकलने वाले कैमिकल के कारण क्षेत्र के भूजल का टीडीएस बढ़कर 750 के पार पहुंच चुका है, जबकि सामान्यतः मानव शरीर के लिए पीने योग्य शुद्ध पानी का टीडीएस स्तर 50 से 150 के बीच होना चाहिए। इन आंकड़ों से साफ है कि पेस्टीसाइड फैक्टरी के आस-पास का पानी अब पीने लायक नहीं बचा है।
