दोनों पक्षों के समर्थन में उतरे ग्रामीण, खाप व वकील, निष्पक्ष जांच की मांग
डीएसपी बनाम हेड कांस्टेबल विवाद ने लिया राजनीतिक रूप
हेड कांस्टेबल सुनील संधु द्वारा डीएसपी ललित कुमार पर लगाए गंभीर आरोपों के बाद अब इस मामले में वकील, खाप सदस्य व अन्य समाज के लोग भी कूद गए हैं। कोई पक्ष सुनील संधु को सही ठहरा रहा है तो कोई डीएसपी ललित कुमार को। मामला अब धीरे-धीरे राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। वहीं कुछ बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि यह मामला पुलिस प्रशासन का आंतरिक मामला है, इसको राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिये। वहीं हेड कांस्टेबल सुनील संधु की एक पुरानी ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, जिसमें सुनील संधु एक युवक को धमकाते हुए सुनाई दे रहे हैं। यह युवक संधु को फोन करके नशे के बारे में जानकारी देना चाह रहा था, लेकिन संधु ने उसकी बात न सुनते हुए उसे धमकाते हुए दोबारा फोन न करने व डायल 112 नंबर पर सूचना देने के बारे में कहा। वहीं इस ऑडियो पर सुनील संधु का कहना था कि युवक शराब पीकर उसे बार-बार कॉल कर रहा था।
शुक्रवार को ही इस मामले में डीएसपी ललित कुमार के समर्थन में भी कई गांवों के लोग पहुंचे। उन्होंने कहा कि डीएसपी ललित एक ईमानदार अधिकारी है। गांव बात्ता के नरेश कुमार ने कहा कि हमें ये लग रहा है कि सुनील संधु अपने सोशल मीडिया पर व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने के चक्कर में ही ऐसे आरोप लगा रहा है। संधु को केवल लोगों की सहानुभूति चाहिए, जो उसे मिल रही है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गांव भानपुरा के पूर्व सरपंच रोशन लाल ने कहा कि हम मोबाइल पर वीडियो देखते हैं कि सुनील संधु नशा करने वाले बच्चों की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते हैं, जो गलत है। अगर कोई बच्चा नशा करता है तो उसे पकड़ो, नशा बेचने वालों को पकड़ो, लेकिन नाबालिग बच्चों की सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर उन्हें पूरे समाज में शर्मिंदा करना उचित नहीं है। अगर किसी बच्चे ने बेइज्जती के डर से कोई गलत कदम उठा लिया तो कौन जिम्मेदार होगा। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच करने की मांग की। पूर्व पार्षद आनंद शर्मा व शिव कुमार शर्मा ने कहा कि सुनील संधु भी अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन ज्यादातर समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। जिससे पता चलता है कि वे ड्यूटी की बजाय सोशल मीडिया पर अपने फॉलोअर्स बढ़ाने व व्यूज के चक्कर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि डीएसपी ललित कुमार एक ईमानदार अधिकारी हैं। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। उनके साथ शिव कुमार शर्मा, वीरेन्द्र मोर, नरेश बात्ता व पूर्व पार्षद आनंद शर्मा मौजूद रहे।
वहीं कानूनविद एवं अधिवक्ता मनीष गिरा व रविंद्र गिरा ने कहा कि पुलिस की ड्यूटी एक अनुशासन की ड्यूटी होती है। अगर पुलिस कर्मचारी ही अनुशासनहीनता करेगा तो लोगों में क्या संदेश जाएगा। अगर हेड कांस्टेबल संधु को उसके उच्चाधिकारी ने कोई धमकी दी थी या झूठे केस में फंसाने की बात बोली थी तो उसे इसकी जानकारी कैथल एसपी, आईजी या डीजीपी को दी जानी चाहिए थी न कि सीधे सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपने उच्चाधिकारियों पर सीधे आरोप लगाने चाहिए थे।
बालू खाप ने मुख्यमंत्री से की निष्पक्ष जांच की मांग
मुख्यमंत्री नायब सैनी के नाम कैथल एडीसी को ज्ञापन देने के बाद बालू खाप के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीन किच्छाना ने कहा कि सुनील संधु हेड कांस्टेबल हैं जबकि ललित कुमार डीएसपी लेवल के अधिकारी है। कैथल एसपी ने सुनील संधु को जांच से पहले ही लाइन हाजिर करके यह साबित कर दिया है कि छोटे कर्मचारी की नहीं सुनी जाएगी। बड़े अधिकारी के पक्ष में ही फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुनील संधु मन से दुखी था और अधिकारियों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित था, इसलिए उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया। किच्छाना ने कहा कि संधु ने जो नशे के टीके पकड़े थे वो पुलिस ने बदल दिए और दूसरे टीके जो भैंसों काे लगाए जाते हैं, वो रख दिए, ताकि नशा बेचने वालों को बचाया जा सके। प्रवीन किच्छाना ने कहा कि अभी मेरे व संधु के पास बहुत से सबूत हैं, जिससे जल्द ही पर्दा उठाया जाएगा। उन्होंने मामले की जांच ईमानदार अधिकारी से करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि हम सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हैं, अगर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो विभिन्न संगठन सड़कों पर उतरकर सरकार व पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

