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समय से पहले बढ़े तापमान ने किसानों की उड़ाई नींद, गेहूं की फसल दांव पर

कृषि विशेषज्ञ बोले- पैदावार में 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ की आ सकती है कमी; एनपीके खाद के स्प्रे की सलाह

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जगाधरी के बूढ़िया में गेहूं की फसल। -हप्र
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मौसम के बिगड़े मिजाज ने फसलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गर्मी करीब 2 हफ्ते पहले ही एडवांस चल रही है। बीते दो-तीन दिनों से तापमान सामान्य के मुकाबले 5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। इससे जहां गेहूं की फसल को लेकर किसान परेशान हैं, वहीं कृषि विशेषज्ञ भी पैदावार पर बुरा असर पड़ने का खतरा जता रहे हैं। यमुनानगर में इस बार करीब 86 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल का रकबा है। 50 फीसदी से ज्यादा फसल में दाना पकने लगा है। किसान अशोक कुमार, मोहन लाल व विशाल का कहना है कि अभी कम से कम 10 मार्च तक मौसम गर्म नहीं होना चाहिए, लेकिन इसके उलट हो रहा है। उन्होंने कहा कि पारा अभी और बढ़ सकता है, जिससे गेहूं की पैदावार कम होने की आशंका सता रही है।

कृषि विभाग के सहायक पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. सतीश का कहना है कि मौजूदा मौसम गेहूं की फसल पर भारी पड़ सकता है। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार 4 से 5 क्विंटल तक कम रह सकती है। उन्होंने इस समस्या से निजात पाने के लिए किसानों को सलाह दी है कि वे प्रति एकड़ गेहूं की फसल में दो किलोग्राम एनपीके को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि जब तक गेहूं का दाना दबाने से उसमें से दूध जैसा तरल पदार्थ निकलता रहे, तब तक फसल की सिंचाई करते रहें। ज्यादा तेज हवा के दौरान सिंचाई करने से बचें।

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