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गेट पर गरज, सदन में तकरार: ‘मर्यादा बनाम अधिकार’ पर अटका बजट सत्र

कांग्रेस के पैदल मार्च से सीएम ने बदला रास्ता, स्पीकर की सख्त नसीहत; विपक्ष बोला-तसल्ली करके छोड़ेंगे

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चंडीगढ़ में सत्र के दौरान विधायकों को हिदायत देते स्पीकर हरविन्द्र कल्याण। -ट्रिन्यू
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हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन विधायी कामकाज से ज्यादा राजनीतिक आचरण और विरोध की सीमाओं पर बहस में उलझ गया। गेट के बाहर कांग्रेस विधायकों के पैदल मार्च और रोष प्रदर्शन ने सदन के भीतर ऐसी तकरार को जन्म दिया, जिसने सत्तापक्ष और विपक्ष को आमने-सामने आ गए। सवाल यह बना कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार कहां तक है और व्यवस्था की रेखा कौन तय करेगा? सुबह कांग्रेस विधायकों के मार्च और विधानसभा गेट के पास प्रदर्शन के कारण मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित कुछ मंत्रियों व विधायकों को निर्धारित प्रवेश मार्ग के बजाय वैकल्पिक रास्ते से सदन पहुंचना पड़ा। भाजपा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने इसे अनुचित बताते हुए अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि विधानसभा परिसर के बाहर इस प्रकार का प्रदर्शन परंपराओं के अनुरूप नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने मामले को गंभीर बताते हुए स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन उसकी सीमाएं भी तय हैं। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान एक स्थान पर पांच से अधिक सदस्यों का खड़ा होना नियमों के विरुद्ध है और स्पीकर आसन के सामने आकर प्रदर्शन करना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने सदस्यों की बॉडी लैंग्वेज पर भी टिप्पणी करते हुए संयम बरतने की सलाह दी।

‘सेक्टर-25’ बनाम ‘विधानसभा गेट’

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‘सेक्टर-25’ बनाम ‘विधानसभा गेट’ की टिप्पणी ने बहस को और तीखा कर दिया। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि धरना देना है तो सेक्टर-25 में दें, वहां कोई नहीं रोकेगा। इसे विपक्ष ने तंज के रूप में लिया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पलटवार करते हुए कहा कि विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और वे ‘तसल्ली करके ही छोड़ेंगे’। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे सदन की गरिमा भंग हुई हो। साथ ही जोड़ा कि यदि मुख्यमंत्री को वास्तव में असुविधा हुई है तो वे खेद व्यक्त करने को तैयार हैं।

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विपक्ष बनाम विपक्ष: जुबानी जंग

सदन का माहौल तब और गरमाया जब रानियां से इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह जनहित के मुद्दों से ज्यादा धरना-प्रदर्शन में व्यस्त है। इस पर कांग्रेस विधायकों ने तीखी आपत्ति जताई। नारनौंद से कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने जवाब देते हुए कहा कि ऐसा विपक्ष पहली बार देखा है जो विपक्ष के खिलाफ बोलता है। कुछ देर के लिए सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।

स्पीकर ने तय की ‘मर्यादा’ की रेखा

अध्यक्ष कल्याण ने दोहराया कि विधायक जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त हैं, लेकिन मर्यादा का पालन अनिवार्य है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि नियमों का उल्लंघन जारी रहा तो सख्ती बरती जाएगी। बजट सत्र का तीसरा दिन भले ही विधायी एजेंडे से भटकता दिखा, लेकिन उसने लोकतांत्रिक व्यवस्था के उस मूल प्रश्न को फिर सामने ला दिया है कि विरोध की आवाज कितनी मुखर हो और अनुशासन की सीमा कितनी कठोर। अब निगाहें इस पर हैं कि आने वाले दिनों में पक्ष और विपक्ष किसी संतुलन पर पहुंचते हैं या सत्र की कार्यवाही इसी ‘गरज और गूंज’ के बीच आगे बढ़ेगी।

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