मेयर पद के लिये अम्बाला में त्रिकोणीय जंग, 1.98 लाख मतदाता आज चुनेंगे ‘शहर सरकार’
निगम चुनाव : भाजपा, कांग्रेस और आजाद प्रत्याशी के बीच कड़ा मुकाबला
अम्बाला नगर निगम यानी ‘शहर सरकार’ के सिंहासन पर कब्जा जमाने के लिए बिछी चुनावी बिसात पर 9 मई की रात ‘कयामत की रात’ मानी जा रही है। 10 मई को होने वाले मतदान से ठीक पहले प्रत्याशियों ने अंदरखाते मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मेयर और 20 वार्ड सदस्यों को चुनने के लिए शहर के 1.98 लाख पंजीकृत मतदाता कल अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
मेयर पद के लिए मुख्य मुकाबला भाजपा की अक्षिता सैनी, कांग्रेस की कुलविंद्र कौर और इनेलो-बसपा-आप समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सोनिया चौधरी के बीच है। जहां भाजपा और कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक के दम पर ‘क्लीन स्वीप’ का दावा कर रही हैं, वहीं सोनिया चौधरी ने गठबंधन के समर्थन से मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है। सभी प्रत्याशियों ने अपने चुनावी घोषणापत्र जारी किए हैं। जहां भाजपा ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार और विकास के नाम पर वोट मांग रही है वहीं विपक्ष और निर्दलीय प्रत्याशी भ्रष्टाचार, एनडीसी की खामियां, सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसे स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच हैं। कल सुबह शुरू होने वाले मतदान के साथ ही इन सभी दिग्गजों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी। वोटरों को रिझाने के लिये सभी पार्टियों के नेता वादे कर रहे हैं।
भाजपा के पूर्व विधायक असीम ने जनता से वादा किया कि केंद्र और प्रदेश में हमारी सरकार है। विकास की निरंतरता के लिए निगम में भी ‘कमल’ खिलना जरूरी है ताकि फंड की कमी न रहे। हम मेयर सहित सभी 21 सीटें जीतेंगे। वहीं जिला शहरी कांग्रेस के प्रधान पवन अग्रवाल डिम्पी ने कहा कि जनता भाजपा के कुशासन से तंग आ चुकी है। अम्बाला में सांसद और विधायक कांग्रेस का है, अब शहर की सरकार भी कांग्रेस की होगी। इनेलो-बसपा-आम समर्थित आजाद उम्मीदवार सोनिया चौधरी का कहना है कि मैं सबसे अधिक शिक्षित उम्मीदवार हूं और निगम की कार्यप्रणाली को समझती हूं। भ्रष्टाचार को दूर करना, एनडीसी और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करना मेरी प्राथमिकता है।
पार्टियों के अपने-अपने दांव और चुनौतियां
- भाजपा की साख दांव पर : मुख्यमंत्री नायब सैनी ने स्वयं 2 बार अम्बाला आकर प्रचार की कमान संभाली। पूर्व मंत्री असीम गोयल पूरे चुनाव प्रबंधन को देख रहे हैं। हालांकि, पार्टी से बागी हुए 8 नेताओं के कारण ‘भीतरघात’ का अंदेशा बना हुआ है।
- कांग्रेस की एकजुटता : सांसद और विधायक कांग्रेस के होने के कारण पार्टी के हौसले बुलंद हैं। पवन अग्रवाल के नेतृत्व में पार्टी पहली बार संगठन के तौर पर चुनाव लड़ रही है। वार्ड-5 में अधिकृत प्रत्याशी के भाजपा में जाने के बाद अब पार्टी वहां आजाद को समर्थन दे रही है।
- आजाद का ‘अनुभव’ कार्ड : सोनिया चौधरी अपनी शैक्षणिक योग्यता और पूर्व पार्षद के अनुभव को ढाल बनाकर मैदान में हैं। उन्हें पति विजय टोनी चौधरी के सर्कल और तीन दलों के गठबंधन का सहारा है।
अम्बाला में आज दुकानें व वाणिज्यिक प्रतिष्ठान रहेंगे बंद
निगम चुनाव के मद्देनजर अम्बाला के जिलाधीश अजय सिंह तोमर ने मतदान के दिन यानी 10 मई को जिले के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए सवैतनिक अवकाश घोषित किया है ताकि अधिक से अधिक मतदान सुनिश्चित किया जा सके। जिलाधीश ने स्पष्ट किया कि यह अवकाश केवल उन श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए मान्य होगा, जो नगर निगम चुनाव-2026 में अपने मताधिकार का प्रयोग करने हेतु पंजीकृत पात्र मतदाता हैं। उन्होंने सभी प्रतिष्ठान संचालकों को निर्देश दिए कि वे अधिसूचना के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें। जिलाधीश ने निर्देश दिए हैं कि मतदान के लिए दिए गए अवकाश के बदले किसी भी कर्मचारी या श्रमिक के वेतन में कटौती नहीं की जानी चाहिए। यदि कोई संचालक किसी पात्र कर्मचारी को मतदान करने से वंचित करता है या अवकाश नहीं देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

