सैटेलाइट इमेज और पोर्टल पंजीकरण के मिसमैच में फंसी हजारों एकड़ धान की फसल
यमुनानगर में 25 फीसदी से अधिक िमलान के मामले अटके, विभाग का दावा- दो दिनों में दूर होगी दिक्क त, करनाल में राइस मिलर्स का रजिस्ट्रेशन भी सुस्त
प्रदेश में धान की आवक तेजी से शुरू हो चुकी है, लेकिन यमुनानगर जिले में हजारों एकड़ धान की फसल ‘पोर्टल मिसमैच’ के पेंच में फंसकर रह गई है। इस तकनीकी खामी के कारण किसानों को मंडियों में अपनी फसल लाने के लिए जरूरी ‘गेट पास’ नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे अन्नदाता परेशान हैं। हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि कर्मचारी इस त्रुटि को दूर करने में लगातार जुटे हैं और दो दिनों में यह समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी।
इस तकनीकी समस्या की तह तक जाने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा मामला सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों और किसान द्वारा ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर किए गए पंजीकरण के बीच आपसी मिलान (मैचिंग) न होने से जुड़ा है। यदि किसी किसान ने सरकारी पोर्टल पर अपनी जमीन पर धान की फसल दर्शाई है, लेकिन सैटेलाइट मैपिंग में वहां कोई अन्य फसल या स्थिति नजर आ रही है, तो सिस्टम उसे ‘मिसमैच’ घोषित कर देता है। अक्सर भौतिक सत्यापन के दौरान यह साबित हो रहा है कि किसान द्वारा पोर्टल पर दी गई जानकारी बिल्कुल सही है, यानी तकनीकी रूप से सैटेलाइट इमेज या उसका डेटा ठीक से काम नहीं कर पा रहा है।
दूसरी ओर, किसान नेता सतपाल कौशिक ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया 31 जुलाई को ही बंद हो चुकी थी। यदि पोर्टल और सैटेलाइट के डेटा में अंतर था, तो इन दो महीनों के दौरान राजस्व और कृषि विभाग को इस पर काम करना चाहिए था। किसान नेता ने मुख्यमंत्री से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
बता दें कि जिले में इस बार कुल 2,45,000 एकड़ भूमि में धान की फसल उगाई गई है, जिसका डेटा पोर्टल पर पंजीकृत हुआ था। इसमें से अभी तक 75 प्रतिशत किसानों का डेटा सफलतापूर्वक मैच हो चुका है, लेकिन लगभग 25 प्रतिशत किसानों का डेटा अभी भी मिसमैच की श्रेणी में अटका हुआ है। उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य डबास ने बताया कि जिन इलाकों का डेटा मिसमैच बता रहा है, वे अधिकांशतः यमुना नदी के आसपास के सीमावर्ती क्षेत्र हैं, जहां नेटवर्क की भी समस्या बनी रहती है। राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मिलकर इस डेटा को दुरुस्त करने में जुटे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो दिनों में यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
खरीद में बदइंतजामी, 3 दिन से नहीं हुआ उठान और ‘5 प्रतिशत कैप’ का विरोध
रमेश सरोए/हप्र
करनाल : नई अनाजमंडी में धान खरीद भारी बेइंतजामी की भेंट चढ़ गई है। गत मंगलवार को हैफेड एजेंसी द्वारा किसान गजेंद्र सिंह की धान खरीद के साथ सरकारी खरीद की शुरुआत की गई थी। कागजों में धान बिके तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मंडी से उसका उठान नहीं हो पाया है। खामियों के चलते मंगलवार से बृहस्पतिवार तक हैफेड की आईडी बंद रही, जिससे शुक्रवार को जाकर आई-फार्म और जे-फार्म बन सके। नियमों के अनुसार बिक्री के बाद तय समय में किसान के खाते में भुगतान पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन उठान न होने से व्यवस्था की पोल खुल गई है।'पाँच प्रतिशत कैप' और मिलर्स का पेंचकिसानों की मुश्किलें बढ़ाने के लिए मंडियों में 'पांच प्रतिशत की कैप' की नई शर्त लागू कर दी गई है। इसके तहत यदि गेट पास 50 क्विंटल का कटा है और तुलाई के दौरान धान 45 या 47 क्विंटल निकलती है, तो पोर्टल पर आई-फार्म व जे-फार्म जनरेट नहीं हो पाएगा। आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने इसे गंभीर संकट बताते हुए शर्त को तुरंत हटाने की मांग की है। दूसरी ओर, धान खरीद शुरू होने के बावजूद राइस मिलर्स का मिलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। पिछले सीजन के दौरान कई मिलर्स पर हुई पुलिस कार्रवाई के डर से वे खुलकर आगे आने से कतरा रहे हैं। मिलर्स सौरभ गुप्ता ने बताया कि जटिल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के कारण अब तक केवल 50-60 मिलर्स ही पंजीकृत हो पाए हैं, जिससे पूरी खरीद और उठान प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
खरीद शुरू न होने पर मंडी गेट पर जड़ा ताला
फतेहाबाद/कैथल (हप्र) : फतेहाबाद में परमल धान की खरीद शुरू न होने से गुस्साए किसानों ने भाकियू (खेती बचाओ) के नेतृत्व में फतेहाबाद अनाज मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया। डीएफएससी और मार्केट कमेटी सचिव के समझाने और हैफेड द्वारा खरीद शुरू करवाने के बाद ताला खोला गया। हालांकि, खरीद शुरू होते ही व्यापार मंडल ने उठान की व्यवस्था स्पष्ट न होने तक विरोध जताया, जिस पर मार्केट कमेटी ने बोली में भाग न लेने वाले दो आढ़तियों को नोटिस जारी किए हैं।
वहीं कैथल और पूंडरी में धान की खरीद शुरू न होने और ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर वेरिफिकेशन में हो रही देरी से किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। भाकियू (चढूनी) और भाकियू (टिकैत) के नेतृत्व में किसानों ने प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट किया। युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना ने चेतावनी दी कि यदि जल्द पोर्टल वेरिफिकेशन और खरीद शुरू नहीं हुई तो किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर कार्यालयों में पहुंचेंगे।
खरीद न होने से परेशान किसानों ने किया पंजाब का रुख
पिहोवा (निस) : मंडी में धान की खरीद न होने से गुस्साए किसानों ने प्रिंस बड़ेच के नेतृत्व में गेट बंद कर धरना प्रदर्शन किया। कई किसान अपनी धान वापस ट्रॉलियों में भरकर पंजाब की ओर रुख करते नजर आए। मंडी सचिव ने बताया कि डेढ़ लाख क्विंटल आवक के मुकाबले केवल 15 हजार क्विंटल धान ही बिक पाया है।
चीका मंडी के गेट पर ताला लगाने से आढ़ती भड़के
गुहला चीका (निस) : मंडी में मार्केट कमेटी प्रशासन द्वारा सिनेमा रोड की तरफ का गेट बंद रखने और ताला लगाने के विरोध में आढ़तियों ने प्रदर्शन किया। मंडी प्रधान कर्म चंद गर्ग व अन्य आढ़तियों ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे में गेट नहीं खोले गए तो वे हड़ताल करने को मजबूर होंगे। उधर, मार्केट कमेटी सचिव सतबीर राविश ने कहा कि धान चोरी रोकने के लिए कुछ गेट बंद किए गए हैं, जिन्हें जल्द खोल दिया जाएगा।
सीएम नायब सैनी ने किया लाडवा मंडी का निरीक्षण, बोले- एक-एक दाना खरीदा जाएगा
लाडवा (निस) : मुख्यमंत्री नायब सैनी ने शुक्रवार शाम अचानक लाडवा अनाज मंडी पहुंचकर धान खरीद व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने मंडी में पहुंची धान की नमी की मात्रा की जांच स्वयं मशीन से की और किसानों व आढ़तियों से बातचीत की। सीएम ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और मंडी में आने वाले किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। उन्होंने किसानों से 17 प्रतिशत नमी वाली फसल ही लाने की अपील की। इस मौके पर मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रभारी कैलाश सैनी, डीसी विश्राम मीणा, एसडीएम राजेश सोनी, मार्केट कमेटी के चेयरमैन डॉ. गणेश दत्त व नपा चेयरपर्सन साक्षी खुराना मौजूद रहे।
कृषि मंत्री राणा ने लिया मंडियों का जायजा
जगाधरी/छछरौली/नारायणगढ़ (हप्र/निस) : कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने छछरौली और नारायणगढ़ अनाज मंडियों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मंडियों में हैफेड द्वारा शुरू की गई धान खरीद का जायजा लिया और साफ-सफाई, पेयजल, बिजली तथा किसानों के बैठने की व्यवस्थाओं पर संतोष जताया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवक बढ़ने पर भी किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

