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पिहोवा अनाज मंडी में तालाब जैसे हालात, किसानों ने खुद निकाला पानी

क्षेत्र में हुई तेज आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कुदरत के कहर और प्रशासनिक लापरवाही ने अन्नदाता को खेतों से लेकर अनाज मंडियों तक बेबस कर दिया है। हालात...

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पिहोवा अनाज में जलभराव। -निस
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क्षेत्र में हुई तेज आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कुदरत के कहर और प्रशासनिक लापरवाही ने अन्नदाता को खेतों से लेकर अनाज मंडियों तक बेबस कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि मंडी में जलभराव के कारण किसानों को खुद हाथों से पानी निकालना पड़ रहा है। गत रात से जारी बारिश ने पिहोवा अनाज मंडी की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। सीवरेज लाइनें लंबे समय से जाम होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पाई, जिससे पूरी मंडी तालाब में तब्दील हो गई और गेहूं के ढेर पानी में तैरने लगे।

डेरा मंगल सिंह के किसान कुलदीप ने बताया कि मंडी में जमा पानी को उन्होंने खुद निकाला, क्योंकि प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि सुविधाएं देने के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। किसान स्वर्ण सिंह ने बताया कि वे करीब 100 टन गेहूं ट्राली में भरकर मंडी ला रहे थे, लेकिन रास्ते में तेज बारिश के कारण पूरी फसल भीग गई, जिससे अब उसकी गुणवत्ता और दाम पर असर पड़ेगा। किसानों ने सरकार से मांग की कि खराब हुई फसल का तुरंत सर्वे करवाया जाए। प्रभावित किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। सीवरेज और सफाई व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त किया जाए ताकि हर साल जलभराव की समस्या न हो।

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खेतों में खड़ी पकी फसल पर आंधी-ओलों की मार

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तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल खेतों में गिरकर बिछ गई। इससे कंबाइन से कटाई करना अब नामुमकिन सा हो गया है और उत्पादन घटने की पूरी आशंका है। बारिश के कारण कटाई का काम पूरी तरह बंद है। अभी तक केवल 5 से 7 प्रतिशत फसल ही मंडी पहुंच पाई थी, वह भी अब नमी की भेंट चढ़ रही है। दोहरी मार झेल रहे किसानों में प्रशासन और सरकार के प्रति भारी आक्रोश है।

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