नशामुक्त और स्वस्थ भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम : आचार्य देवव्रत
दयानंद महिला महाविद्यालय में गुजरात के राज्यपाल ने छात्राओं से किया संवाद, प्राकृतिक खेती, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली का दिया संदेश
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि देश के युवाओं की ऊर्जा और सकारात्मक सोच का उपयोग समाज, किसानों, पशुओं और पर्यावरण के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। सामाजिक परिवर्तन केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के व्यक्तिगत संकल्प से शुरू होता है। उन्होंने युवाओं से नशामुक्त, स्वस्थ एवं स्वच्छ भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
वे शनिवार को दयानंद महिला महाविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘नशामुक्त, स्वस्थ एवं स्वच्छ भारत के निर्माण में युवाओं का योगदान’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। महाविद्यालय पहुंचने पर प्राचार्या डॉ. उपासना आहूजा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, वैदिक मंत्रोच्चारण और राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ।
महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार ने आचार्य देवव्रत का स्वागत करते हुए किसानों, युवाओं, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति के क्षेत्र में उनके प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने प्राकृतिक एवं जीरो बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी सराहना की।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
छात्राओं के साथ किया संवाद
व्याख्यान के बाद छात्राओं के साथ संवादात्मक सत्र हुआ। छात्राओं ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती, नशामुक्ति, मादक पदार्थों की तस्करी तथा नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को पकड़ने में आने वाली चुनौतियों से संबंधित प्रश्न पूछे। आचार्य देवव्रत ने सवालों के जवाब देते हुए विद्यार्थियों को जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न और पारंपरिक शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में अंजू चावला, डॉ. हिमानी और कार्यक्रम संयोजिका डॉ. श्वेता सैनी का विशेष योगदान रहा।

