मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल से सरकार को 700 करोड़ की सब्सिडी बची : बराला
राज्यसभा में हरियाणा मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मांग
राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने शुक्रवार को राज्यसभा में हरियाणा में लागू एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली व मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के साथ किए गए एकीकरण का मुद्दा उठाते हुए इसे पारदर्शी और जवाबदेह शासन का प्रभावी उदाहरण बताया। सांसद ने सदन को बताया कि एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली और मेरी फसल मेरा ब्यौरा के एकीकरण से किसान पंजीकरण, भूमि व फसल का डिजिटल सत्यापन, उर्वरक वितरण तथा सब्सिडी निगरानी की समस्त प्रक्रिया एक ही प्रमाणिक डिजिटल मंच से जुड़ गई है। अब यूरिया, डीएपी तथा अन्य सब्सिडी युक्त उर्वरक केवल तभी वितरित किए जाते हैं, जब पीओएस मशीन पर मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल में दर्ज भूमि एवं फसल विवरण का विधिवत मिलान हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के लागू होने से 8 अक्टूबर 2025 के बाद उर्वरकों की खपत में कमी आई है और सरकार को 700 करोड़ की अनुमानित सब्सिडी की बचत हुई है। यह बचत इस बात का प्रमाण है कि अब सब्सिडी वास्तविक और सत्यापित कृषि उपयोग तक ही सीमित हो रही है। बराला ने बताया कि यह मॉडल रीयल-टाइम डेटा के आधार पर उर्वरक मांग का सटीक आंकलन करने, बेहतर लॉजिस्टिक्स योजना बनाने तथा समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध हुआ है। इससे किसानों को आवश्यक उर्वरक समय पर प्राप्त हो रहे हैं और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आई है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि हरियाणा के इस सफल मॉडल का विस्तृत अध्ययन करके इसे अन्य राज्यों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार किया जाए, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था अधिक पारदर्शी, कुशल, जवाबदेह और टिकाऊ बन सके।

